वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानि शनिवार को प्रेस कान्फ्रेंस के जरिये 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज से जुड़ी चौथी चरण की घोषणाएं कर रही हैं।
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानि शनिवार को प्रेस कान्फ्रेंस के जरिये 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज से जुड़ी चौथी चरण की घोषणाएं कर रही हैं। सीतारमण की ओर से बुधवार से लगातार रोज शाम 4 बजे मीडिया के सामने लॉकडाउन से प्रभावित लोगों, सेक्टर्स एवं उद्योगों के लिए किए जा रहे उपायों की घोषणा की जा रही है। वित्त मंत्री ने आज कोयला, मिनरल्स, डिफेंस प्रोडक्शन, एयरस्पेस मैनेजमेंट, एयरपोर्ट, एमआरओ, केंद्रशासित प्रदेशों की बिजली वितरण कंपनियां, स्पेस, एटोमिक एनर्जी जैसे आठ सेक्टर्स पर बात की।

पावर सेक्टर में कुछ बदलाव होंगे। उपभोक्ताओं को उनके अधिकार, पर्याप्त बिजली होगी, बिजली कंपनियों का नुकसान उपभोक्ता को नहीं झेलनी पड़ेगी। बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। पावर जेनरेशन कंपनियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इनका चयन भी उसी आधार पर होगा, जिससे कि वो अच्छी सुविधाएं दे सके। यूनियर टेरेटेरी में पावर डिस्कॉम का निजीकरण पहले होगा। वहीं बताए बिना कट जाती है तो कंपनी पर जुर्माना लगेगा।
शुक्रवार को निर्मला सीतारमण की ये प्रेस कॉन्फ्रेंस पूरी तरह किसान केंद्रित थी। इस दौरान कृषि क्षेत्र के लिए 11 ऐलान किए गए। इसमें 8 फैसले कृषि और इंफ्रा से जुड़े थे जबकि 3 फैसले गवर्नेंस और रिफॉर्म के हैं। सरकार ने कृषि के बुनियादी ढांचे के लिए एक लाख करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है। इस दौरान एक अहम फैसला आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में बदलाव को लेकर लिया गया। अब इस अधिनियम से अनाज, तिलहन, प्याज, आलू आदि को मुक्त किया जाएगा।
जबकि गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में निर्मला सीतारमण ने पटरी-रेहड़ी कारोबारी, छोटे किसान, प्रवासी श्रमिकों से जुड़े 9 बड़े ऐलान किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि 50 लाख रेहड़ी-पटरी कारोबारियों के लिए 10 हजार रुपये का विशेष लोन दिया जाएगा। इसी तरह, शिशु लोन पर छूट, क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम की डेडलाइन बढ़ा दी गई है।
वहीं बुधवार को करीब 6 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान हुआ। इस पैकेज में से एक बड़ा हिस्सा सूक्ष्म, लघु और मझोले कारोबार (एमएसएमई) को दिया गया है। वहीं सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मझोले कारोबार की परिभाषा में भी बदलाव कर दिया है। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों, एमएफआई को 30,000 करोड़ की नकदी सुविधा दी गई है। इसी तरह, बिजली वितरण कंपनियों पर 94,000 करोड़ रुपये का बकाया है और उनको 90,000 करोड़ का बेल आउट दिया गया है।
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