नयी दिल्ली। कोरोना संकट के आर्थिक प्रभाव से निपटने के लिए पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया था। इसी पर जानकारी देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। आज 8 बड़े सेक्टरों पर ऐलान किए गए जिनमें कोयला शामिल है। बता दें कि सरकार ने कोयला सेक्टर, जिसे ब्लैक गोल्ड के नाम से भी जाना जाता है, में अपना एकाधिकार खत्म कर दिया है। वित्त मंत्री ने बताया कि कोल इंडिया लिमिटेड की खदाने भी प्राइवेट सेक्टर को दी जाएँगी। साथ ही ज्यादा से ज्यादा खनन और देश के उद्योगों को बल देने पर फोकस रहेगा। 50 ऐसे नए ब्लॉक नीलामी के लिए उपलब्ध होंगे। खास बात ये है कि प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों के हिस्सा लेने के लिए पात्रता की बड़ी शर्तें नहीं रहेंगी। वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि कोयला उत्पादन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता कैसे बने और कैसे कम से कम आयात करना पड़े, इस पर काम करना है। कोयला क्षेत्र में कमर्शल माइनिंग होगी और सरकार का एकाधिकार खत्म होगा।

भारत के पास कोयले का बड़ा भंडार
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की अप्रयुक्त (जिन्हें एक्सप्लोर नहीं किया गया है) खानों में तीसरी सबसे बड़ी उपलब्धता कोयले की है। मगर फिर भी हम कोयला आयात करते हैं और इमर्जिंग सेक्टर्स को नुकसान होता है क्योंकि कच्चा माल उपलब्ध नहीं होता। हमारे देश में काफी मात्रा में कोयला है। उन्होंने बताया कि कोल बेड मिथेन की भी नीलामी होगी। साथ ही उन्होंने कोयला सेक्टर के इंफ्रा के लिए 50,000 करोड़ रुपये आवंटन करने का भी ऐलान किया।
कोयला सेक्टर के लिए नीतिगत कदम
राजस्व हिस्सेदारी में छूट के माध्यम से कोयला गैसीकरण / द्रवीकरण तेज किया जाएगा। इससे पर्यावरण पर कम प्रभाव पड़ेगा। साथ ही इससे भारत को गैस आधारित इकोनॉमी बनने में मदद मिलेगी। सरकार ने जो 50000 करोड़ रु कोयला सेक्टर के लिए आवंटित किए हैं इसमें से 18000 करोड़ रुपये कोयले को खदानों से रेलवे तक पहुंचाने के लिए बेहतर इंफ्रा बनाने पर खर्च होंगे।


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