नई दिल्ली, सितंबर 5। फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) को आज के व्यक्त में एक अच्छा और सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है। इसमें आपको बचत खाते में एक बेहतर रिटर्न मिलता है। सेविंग अकाउंट में बचत और सुरक्षा दोनों मिलती है। एफडी में विभिन्न मैच्योरिटी टेन्योर मिलते हैं। जिसको आप अपनी सुविधा के अनुसार चुन सकते है। मुनाफा कमाने के बाद आप सारे पैसे निकाल सकते है।
कौन सी एफडी फायदेमंद
एफडी खोलने की सुविधा अब सभी बैंको के पास होती है। अपनी जमा रूपये में ब्याज दर बैंक के हिसाब से मिलता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की तरफ से हाल ही में रेपो रेट में बढ़ोतरी की गई थीं। जिसके बाद से बैंकों ने भी एफडी की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी। ऐसे में ये सवाल उठता है कि सबसे अधिक मुनाफा कमाने के लिए किस तरह की एफडी फायदेमंद रह सकती है। फिक्स्ड रेट एफडी या फ्लोटिंग रेट एफडी इनमें से क्या अधिक फायदेमंद है।
फ्लोटिंग रेड एफडी और फिक्स्ड डिपॉजिट कौनसा बेहतर
एक्सपर्ट्स के अनुसार, रेपो रेट में इजाफा हो रहा है इसलिए आपको फ्लोटिंग रेड एफडी बेहतर लग रही है। क्योंकि इसमें ब्याज की दरें भी बढ़ रही है, यदि नीतिगत दरों में गिरावट शुरू हुई तो एफडी की ब्याज दरें भी कम होने लगेंगी। वही फिक्स्ड डिपॉजिट में ऐसा नहीं होता है। फिक्स्ड डिपॉजिट में आपको पहले से ही फिक्स्ड ब्याज दर मिलती रहती है। मैच्योरिटी पर आपको इसका फायदा मिलता है। यदि ब्याज दर मैच्योरिटी से पहले फिक्स्ड रेट को पार कर गई तो फिर आपको इसमें नुकसान भी हो सकता है। इसी वजह से आपको फिक्स्ड रेट एफडी खरीदते व्यक्त इस बात का जरूर ध्यान देना चाहिए कि टेन्योर में मौजूदा ब्याज दर इतनी आगे बढ़ सकती है कि आपकी फिक्सड रेट को पार कर जाए।
रेपो रेट बढ़ने से एफडी की ब्याज दरों में भी इजाफा
आरबीआई ने पिछले 4 महीने में 3 बार रेपो रेट इजाफा कर इसे 5.40 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। ऐसा इसी लिए किया गया है क्योंकि महंगाई काबू में रहें। बैंको का आरबीआई से लोन लेना महंगा पड़ता है साथ ही वे खुदरा ग्राहकों को भी महंगी ब्याज दरों में लोन देने लगते है। जिस कारण से लोन की मांग कम होती है और बाजार ने कैश फ्लो पर लगाम लगाती है। मगर यदि रेपो रेट बढ़ेगा तो फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज की दरें भी बढ़ेगी। जिस वजह से इनवेस्टर्स की बेहतर लाभ मिलता है।


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