Fitch Ratings downgrades US credit rating: फिच रेटिंग्स ने बढ़ते राजकोषीय घाटे के आधार पर अमेरिका के सॉवरेन क्रेडिट ग्रेड को एएए से एक स्तर घटाकर एए+ कर दिया है। यह जानकारी ब्लूमबर्ग ने 2 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में दी है। बताया गया है कि अमेरिका में डेट लिमिट की बार बार आने वाली दिक्कत भी इसका एक बड़ा कारण है। फिच रेटिंग की तरह ही 2011 में स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ग्लोबल रेटिंग्स ने भी ऐसा ही कदम उठाया था।
किसी भी देश की क्रेडिट रेटिंग गिरने से उस देश की सरकार और कंपनियों को बाजार से कर्ज महंगा मिलने लगता है। इससे उनकी कर्ज की लागत बढ़ती है, जिससे नई दिक्कतें खड़ी होती हैं।

फिच के इस कदम से अमेरिका के अधिकारी आश्चर्यचकित हैं। हालांकि दुनिया की तीन प्रमुख रेटिंग एजेंसियों ने अमेरिका को पहले इस तरह की चेतावनी दी थी कि उसका एएए क्रेडिट ग्रेड खतरे में है। इससे पहले मई में, फिच ने अमेरिकी क्रेडिट को 'रेटिंग वॉच नेगेटिव' पर डाल दिया था।
फिच रेटिंग्स ने अपने बयान में कहा है कि टैक्स घटाना और कई नए खर्च बढ़ाने से अमेरिका का बजट घाटा बढ़ जाएगा। फिच के रेटिंग घटाने का मतलब है कि अगले करीब 3 साल तक अमेरिका में खर्च ज्यादा रहेगा। फिच के अनुसार इन कारणों से उसने अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग को घटाया है।
फिच की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में पिछले 20 वर्षों में शासन चलाने के मानकों में लगातार गिरावट आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में बार-बार ऋण सीमा का लिमिट तक आना और फिर बढ़ाने के लिए राजनीतिक गतिरोध पैदा होना। इसके बाद आखिरी मिनट समझौता होना ऐसे कारण हैं, जिनसे क्रेडिट रेटिंग को घटाया गया है।
फिच ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अमेरिका पर तेजी से बढ़ता कर्ज का बोझ 2025 तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 118 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। यह 'एएए' औसत 39.3 प्रतिशत से 2.5 गुना अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबी अवधि में ऋण-जीडीपी अनुपात बढ़ेगा, जिससे अमेरिका 'भविष्य के आर्थिक झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील' हो जाएगा।
ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि रेटिंग में गिरावट के बाद दो-वर्षीय ट्रेजरी पर ब्याज दर तीन आधार अंक गिरकर 4.87 प्रतिशत हो गई। वहीं 10-वर्षीय अमेरिकी बांड पर यील्ड एक आधार अंक गिरकर 4.01 प्रतिशत हो गई।
फिच के डाउनग्रेड के बाद अमेरिकी स्टॉक वायदा में गिरावट आई। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज वायदा 75 अंक या 0.2 प्रतिशत गिर गया। एसएंडपी 500 और नैस्डैक-100 वायदा में क्रमशः 0.3 प्रतिशत और 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई।
उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों की रिपोर्ट के बाद भी व्यापक बाजार सूचकांक 0.27 प्रतिशत गिर गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 0.43 प्रतिशत गिर गया। इस बीच, डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 71.15 अंक या 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
बीएनपी पारिबा में एशिया प्रशांत इक्विटी रिसर्च के प्रमुख मनीषी रायचौधरी के अनुसार आज सुबह एशिया में ज्यादातर उथल-पुथल और ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव फिच के फैसले के बाद शुरू हुआ है। यह एक तरह की अल्पकालिक प्रतिक्रिया है, इसलिए हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा कि इसका क्या परिणाम होता है।
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