नई दिल्ली, अप्रैल 22। हाल ही में अमेरिकी बैंक सिटीबैंक ने भारत ने अपना कंज्यूमर बैंकिंग बिजनेस बेचने का ऐलान किया था। अब एक विदेशी बैंक ने भारत से निकलने का ऐलान किया है। सिटीबैंक के कंज्यूमर बैंकिंग बिजनेस बेचने की घोषणा के बाद अब दक्षिण अफ्रीका के दूसरे सबसे बड़े बैंक फर्स्टरैंड बैंक भारत से निकलने का ऐलान किया है। 12 साल बाद ये बैंक भारत से बाहर एग्जिट करने जा रहा है। सिटीबैंक ने ऐलान किया था कि यह भारत में अपने कंज्यूमर बैंकिंग बिजनेस बेचेगा। एक हफ्ते के अंदर भारत में कारोबार कम करने वाला फर्स्टरैंड दूसरा बैंक है।
कब आया भारत में
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फर्स्टरैंड को भारत में बैंकिंग सेवाओं के लिए 12 साल पहले 2009 में लाइसेंस मिला था। फर्स्टरैंड बैंक ने भारत में इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के तौर कारोबार शुरू किया था। फिर ये बाद में रिटेल कारोबार सेक्टर में भी कूद गया। अब ये भारत में कारोबार खत्म कर रहा है। बता दें कि इससे पहले सिटीबैंक ने कहा कि वह एशिया और चार बाजारों (सिंगापुर, हांगकांग, यूएई और लंदन) में वैश्विक उपभोक्ता बैंकिंग पर ध्यान देगा।
कितनी है फर्स्टरैंड की संपत्ति
फर्स्टरैंड की संपत्ति 118 अरब डॉलर है। दक्षिण अफ्रीका स्थित जोहान्सबर्ग इस बैंक एक वीडियोकांफ्रेंस के जरिए ये खबर दी। बैंक के भारतीय सीईओ रोहित वाही ने मुंबई में अपनी एकमात्र शाखा को बंद करने की घोषणा करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया। इस कदम का असर 50 नौकरियों पर पड़ेगा। इस बैंक की भारत में केवल एक ही शाखा है।
एसएमई को कर्ज
जैसा कि हमने बताया कि इस बैंक ने 2009 में कारोबार शुरू किया और 2012 में खुदरा ग्राहकों और छोटे और मध्यम उद्यमों को लोन देना शुरू किया। बैंक की योजना थी कि कारोबार को बढ़ाया जाए और अधिक शाखाएँ खोली जाएँ और अंततः भारत में एक सब्सिडरी कंपनी की स्थापना की जाए, लेकिन उन योजनाओं का कोई फायदा नहीं हुआ। 2016 में बैंक ने कहा था कि वह भारत में कॉरपोरेट और निवेश बैंकिंग पर ध्यान देगा।
कई बैंक भारत से चले गए
पिछले 20 सालों में करीब 6 विदेशी बैंकों ने भारत में अरबों डॉलर लगाए ताकि रिटेल बिजनेस में ग्रोथ हासिल करें। मगर ऐसा हुआ नहीं। इन बैंकों को भारत से मजबूरन जाना पड़ा। सबसे पहले एएनजेड ग्रिंडलेज भारत से गया। ये एक समय भारत में मौजूद सबसे बड़ा विदेशी बैंक था। मगर सन 2000 में इसने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक को अपना भारतीय बिजनेस बेचा और देश से चला गया।
सिटीबैंक का प्लान
सिटीग्रुप ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, चीन, भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, फिलीपींस, पोलैंड, रूस, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम में अपनी कंज्यूमर फ्रेंचाइजी कारोबार से बाहर निकलने की तैयारी में है। मगर सिटी ग्रुप अपने संस्थागत ग्राहकों को उन मार्केट्स में उत्पाद पेश करना जारी रखेगा, जिनमें प्राइवेट बैंक, कैश मैनेजमेंट और इनवेस्टमेंट बैंकिंग और ट्रेडिंग व्यवसाय शामिल हैं। बता दें कि सिटी बैंक भारत में 1902 में आया था परिचालन। इस वक्त देश में इसकी 35 शाखाएं और 25 लाख से ज्यादा ग्राहक हैं। बैंक के 4000 कर्मचारी भी हैं।
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