International Monetary Fund: एक जानकारी के मुताबिक इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड ने हाल ही में भारत के कर्ज को लेकर अनुमान जारी किया गया है। आईएमएफ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि देश का सरकारी लोन 2027-28 के साल तक जीडीपी के 100 प्रतिशत स्तर को पार कर सकता है। इस पर वित्त मंत्रालय ने कहा है कि भारत द्वारा लोन को लेकर आईएमएफ के पूर्वानुमान को गलत समझा गया है। फाइनेंस मिनस्ट्री के एक बयान के अनुसार भारत के कर्ज की स्थिति की उतनी बड़ी चिंता का विषय नहीं है, जितना अनुमान लगाया जा रहा है।
वित्त मंत्रालय ने इसके लिए कई पॉइंट्स को हाइलाइट भी किया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुकूल परिस्थितियों में भारत का कर्ज जीडीपी कर्ज रेश्यो घटकर 70 प्रतिशत तक नीचे भी आ सकता है।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी की गई एक और रिपोर्ट के अनुसार दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भारत के मुकाबले ज्यादा मुश्किल परिस्थितियों और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान अपने आंकड़ों में वित्त मंत्रालय ने बताया है कि अमेरिका को 160 फीसदी, चीन को 200 फीसदी और ब्रिटेन को करीब 140 फीसदी डेट-टू-जीडीप रेश्यो यानी जीडीपी के मुकाबले कर्ज का सामना करना पड़ सकता है।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि इन देशों के मुकाबले भारत का 100 प्रतिशत कर्ज का अनुमान रेश्यो काफी आम नजर आता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की सरकार ने पॉजिटिव फिस्कल ट्रेंड्स का हवाला देते हुए फिस्कल ईयर 2021 में सरकारी कर्ज में लगभग 88 फीसदी से आने वाले साल 2022-23 में 81 फीसदी तक की कमी होने की संभावना भी जाहिर की है। वित्त मंत्रालय के अनुसार सरकार का लक्ष्य फिसकल ईयर यानी कारोबारी साल 2026 तक राजकोषीय घाटे को जीडीपी के मुकाबले 4.5 फ़ीसदी तक कम करना रखा गया है।
वहीं कम बजट घाटे को स्वीकार करते हुए इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने बढ़े हुए पब्लिक कर्ज की तरफ इंडिकेशन दिया है और भारत को फिस्कल बफर बढ़ाने की सलाह दी है। वहीं दूसरी तरफ देश के वित्त मंत्रालय ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी और सब्सिडी में अमेंडमेंट को प्राथमिकता देने की बात कही है। वित्त मंत्रालय ने पब्लिक निवेश, जीएसटी और और सब्सिडी को प्राथमिकता देने के लिए अतिरिक्त राजस्व और खर्च के उपायों की तरफदारी की है।
भारत के वित्त मंत्रालय के अनुसार वैश्विक स्तर पर जारी उतार-चढ़ाव जैसे वैश्विक वित्तीय संकट, कोरोना महामारी का जबरदस्त प्रभाव और यूक्रेन रूस युद्ध जैसी घटनाओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। भारत के फाइनेंस मिनिस्ट्री के अनुसार भारत का लोन लेवल अभी भी साल 2002 के लेवल के मुकाबले नीचे बना हुआ है।
वित्त मंत्रालय के इस बयान से पता चलता है कि इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के द्वारा जताई जा रही चिंता कोई विशेष परेशानी का विषय नहींं है। भारत लगातार अपने कर्ज के स्तर को कम करने का प्रयास कर रहा है और बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के साथ आगे आने वाले सालों में जीडीपी के मुकाबले 100 फीसदी कर्ज रेश्यो को कम करने में भी भारत को कोई खास दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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