नई दिल्ली। बजट से पहले देश की आर्थिक स्थिति की जानकारी देने वाले आर्थिक सर्वे को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में पेश किया। आर्थिक सर्वेक्षण में देश के आर्थिक विश्लेषण और चालू वित्त वर्ष का लेखाजोखा का हिसाब दिया जाता है। इससे आगे के साल में क्या उठाने हैं, इस बात का अंदाजा लगाया जाता है। इस आर्थिक सर्वे में वित्तीय वर्ष 2022 में जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 11 फीसदी का लगया गया है।

चालू वर्ष में कितना गिरेगी जीडीपी
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि 2020-21 में देश की जीडीपी में 7.7 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। यह रिजर्व बैंक (7.5 प्रतिशत गिरावट), और केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (7.7 प्रतिशत गिरावट) के अनुमानों के अनुरूप है।
भारत दुनिया में अकेला देश
मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन और उनकी टीम ने तैयार किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा है कि संक्रमण की दूसरी लहर से बचते हुए भारत की अर्थव्यवस्था ने तेजी से विकास शुरू है, जो दुनिया में अकेला उदाहरण है। वहीं सर्वेक्षण में यह भी तर्क दिया गया कि भारत की संप्रभु क्रेडिट रेटिंग ने इसके वास्तविक मूल सिद्धांतों को प्रतिबिंबित नहीं कर रही है।
हेल्थकेयर पर खर्च बढ़ाने की जरूरत
आर्थिक सर्वे में हेल्थकेयर पर सरकारी खर्च जीडीपी का 2.5 फीसदी से लेकर 3 फीसदी तक ले जाने की बात कही गई है। 2017 की नेशनल हेल्थ पॉलिसी में भी यह लक्ष्य रखा गया था। इसके बावजूद अभी यह जीडीपी का 1 फीसदी के आसपास है। इंटरनेट कनेक्टिविटी और हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर में खर्च बढ़ाना चाहिए, जिससे टेलीमेडिसिन को बढ़ावा मिल सके।
तीसरी बड़ी इकोनॉमी बनने के लिए इनोवेशन जरूरी
आर्थिक सर्वे में आर्थिक वृद्धि दर तेज करने के लिए अपनाए जा सकने वाले उपायों का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि अभी भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी है। अगर इसे तीसरे स्थान पर पहुंचना है, तो इनोवेशन पर ध्यान देना पड़ेगा।
ये है जीडीपी का अनुमान
आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया है कि भारत में 2021-22 में 11% और 2022-23 में 6.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर रहेगी। यह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुमान के अनुरूप है। भारत को आईएमएफ के अनुसार अगले दो वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने की उम्मीद है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि हाल ही में सीपीआई मुद्रास्फीति में नरमी से आपूर्ति पक्ष की बाधाओं में कमी आई है जिससे खाद्य मुद्रास्फीति प्रभावित हुई है।
निजी रेल परिचालन 2023 से
हवाई यात्रा और विमान परिचालन 2021 की शुरुआत में महामारी के पूर्व के स्तर पर आ जाएगा
मई 2021 तक निजी ट्रेनों के लिए बोली प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है
2023-24 में निजी रेल गाड़ियों के चलते की संभावना
आर्थिक सर्वे 2021 की खास बातें
कोरोनावायरस संक्रमण का सबसे बुरा असर मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन पर पड़ा है
कृषि क्षेत्र से सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं
सरकार के खर्च बढ़ाने और एक्सपोर्ट से ग्रोथ की गिरावट थमी है
फिस्कल ईयर 2022 में GDP की ग्रोथ 11 फीसदी रह सकती है
भारत की जीडीपी 2021-22 में 11 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान
भारत की जीडीपी 2022-23 में 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान
सर्वे के मुताबिक, इकोनॉमी में V शेप रिकवरी नजर आ रही है
देश की आर्थिक दशा का अंदाजा देती है यह रिपोर्ट
आर्थिक सर्वे के तहत सरकार देश की आर्थिक हालत का ब्योरा देती है। साल भर में देश में विकास की क्या स्थिति रही, किस मोर्चे पर कितना निवेश हुआ, किन योजनाओं को किस तरह अमल में लाया गया जैसे सभी पहलुओं पर इस सर्वे में जानकारी दी जाती है। आर्थिक सर्वे में अर्थव्यवस्था को लेकर पूर्वानुमान और नीतिगत स्तर पर चुनौतियों संबंधी विस्तृत सूचनाओं का भी समावेश होता है। इसमें क्षेत्रवार हालात की रूपरेखा और सुधार के उपायों के बारे में बताया जाता है। एक लिहाज से देखें तो यह सर्वेक्षण भविष्य में बनाई जाने वाली नीतियों के लिए एक दृष्टिकोण का काम करता है।


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