नयी दिल्ली। सोमवार को लोकसभा में फाइनेंस बिल 2020 बदलावों के साथ पास हो गया। कोरोनावायरस के खतरे के बीच राजनीतिक दलों ने वित्तीय वर्ष 2021 के लिए केंद्र सरकार के फाइनेंशियल और टैक्स प्रस्तावों को बिना चर्चा के मंजूरी देने पर सहमति दे दी। विपक्षी दलों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से कारोबारों और लोगों की आजीविकाओं पर कोरोनावायरस के प्रभाव से निपटने के लिए सरकार के वित्तीय पैकेज पर जवाब मांगा। विपक्षी दल सरकार से कोरोनावायरस के प्रभाव से निपटने के लिए स्पेशल फाइनेंशियल पैकेज की मांग कर रहे हैं। कुछ विपक्षी सासंदों ने सीतारमण द्वारा प्रस्तावित बिल में विशिष्ट संशोधनों पर मतदान में बाधा डाली। क्योंकि उनकी मांग थी कि बिल को मंजूरी देने से पहले एक पैकेज की घोषणा की जाए।

बिना बाधा के बिल पास होने की थी तैयारी
स्पीकर ओम बिरला ने संसद सदस्यों से कहा कि वे बिना किसी देरी के विधेयक को मंजूरी देने के लिए एक दिन पहले फ्लोर लीडर्स से मिले थे। उन्होंने कहा मैं फ्लोर नेताओं से मिला हूं। सभी नेताओं ने देश की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए, बिना चर्चा के वित्त विधेयक पारित करने के लिए सहमति व्यक्त की है। फाइनेंस बिल को ध्वनि मत से पारित किया गया। फाइनेंस बिल में उन लोगों के लिए एक अधिक प्रगतिशील व्यक्तिगत आयकर रेट का प्रस्ताव रखा गया है जो किसी भी टैक्स बेनेफिट का लाभ नहीं उठाते हैं।
एनआरआई होंगे प्रभावित
इस बिल में टैक्स रेसिडेंस के संबंध में एक विवादास्पद प्रस्ताव भी है, जिससे एनआरआई भारतीय प्रभावित होंगे। बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री ने अनिवासी भारतीयों यानी एनआरआई लोगों से जुड़े टैक्स नियमों में बदलाव का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि वे एनआरआई जो विदेशों में टैक्स नहीं भरते उन्हें अब भारत में टैक्स चुकाना होगा। वित्त मंत्री ने साफ किया था कि किसी भी एनआरआई की केवल उसी इनकम पर टैक्स लगेगा जो उसने भारत में कमाई हो। साथ ही उन्होंने बताया था कि टैक्स फ्री क्षेत्राधिकार में होने वाली इनकम पर भी टैक्स नहीं लगेगा।


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