नई दिल्ली, जुलाई 3। बैंकों के अनक्लेम्ड डिपॉजिट (जिसके लिए दावा न किया गया हो) की समीक्षा करके भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक नया नियम लागू किया है। सावधि जमा (टीडी/एफडी) के मैच्योर होने पर यदि पैसा अनक्लेम्ड रहता है तो ग्राहकों को उस पर ब्याज का ब्याज का भुगतान किया जाएगा। आरबीआई ने एक बयान में कहा है कि यह फैसला लिया गया है कि यदि कोई सावधि जमा मैच्योर होती है और मैच्योरिटी राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो बैंक के पास पड़ी अनक्लेम्ड राशि पर बचत खाते पर लागू ब्याज दर या मैच्योर टीडी पर ब्याज दर, जो भी कम हो, का भुगतान किया जाएगा।
ग्राहकों को होगा फायदा
आरबीआई का नियम निवेशकों के लिए काफी फायदेमंद है। क्योंकि यदि आप एफडी करा कर भूल जाएं तो मैच्योरिटी के बाद आपकी जमा राशि पर आपको ब्याज मिलता रहेगा। एफडी के जमा राशि नियम में कहा गया था कि यदि कोई एफडी मैच्योर होती है और प्राप्त राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो बैंक के पास मौजूद अनक्लेम्ड राशि पर बचत जमा पर दी जाने वाली ब्याज दर लागू होगी।
कितना है अनक्लेम्ड पैसा
आरबीआई की तरफ से ये नियम ऐसे समय पर बदला गया है जब बैंकों के पास अनक्लेम्ड राशि हर साल बढ़ रही हैं। वित्त वर्ष 2018-19 के अंत तक बैंकों के पास करीब 18,380 करोड़ रु अनक्लेम्ड राशि थी। उससे एक साल पहले यह राशि 14,307 करोड़ रु थी।
कौन-कौन से खाते होंगे शामिल
जब कोई ग्राहक 10 साल या उससे अधिक समय तक खाते में कोई लेन-देन नहीं करता है तो आरबीआई उसकी जमा राशि को अनक्लेम्ड के रूप में क्लासिफाई करता है। अनक्लेम्ड राशि में चालू और बचत खातों, सावधि जमा और बैंकों के पास अन्य जमा (जैसे आरडी, पे-ऑर्डर आदि) शामिल हैं।
आरबीआई के पास जाता है पैसा
ऐसा सारा पैसा हर महीने आरबीआई के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस (डीईए) फंड में ट्रांसफर किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में डीईए फंड लगभग 33,114 करोड़ रु था। केंद्रीय बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार उससे पिछले साल यह 25,747 करोड़ रु था।
निवेश किया जाता है पैसा
विभिन्न बैंकों द्वारा डीईए फंड में ट्रांसफर किए गए पैसे को आरबीआई द्वारा गठित एक समिति द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों जैसे उपकरणों में निवेश किया जाता है। इस तरह होने वाली इनकम का उपयोग जमा पर ब्याज का भुगतान करने के साथ-साथ निवेशक जागरूकता और शिक्षा उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
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