नई दिल्ली, अगस्त 16। अगर आप भी फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करते हैं तो यह खबर आपके लिए है। आरबीआई ने कुछ समय पहले एफडी के नियमों में बदलाव किया था, अब यह बदले हुए नियम प्रभावी हो चुके हैं। रिजर्व बैंक ने पिछले तीन महीने में तीन बार रेपो दरों में बढ़ोत्तरी की थी। आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने के बाद सभी बैंको ने ब्याज दरों को बढ़ाया है। चलिए आपको बताते हैं कि आरबीआई के नए नियम से एफडी करने वाले ग्राहको को क्या फर्क पड़ेगा।
मैच्योरिटी नियम के नियम बदले
रिजर्व बैंक ने एफडी संबंधित नियमों में बदलाव किया है। नियमों में बड़ा बदलाव यह है कि अगर कोई निवेशक मैच्योरिटी का समय पूरा होने के बाद राशि पर क्लेम नहीं करता हैं तो आपको इस पर कम ब्याज मिलेगा। यह ब्याज घटकर सेविंग अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज के बराबर हो जाएगा। अभी सामान्य तौर पर सभी बैंक 5 से 10 साल की समय अवधि वाले फिक्स डिपॉजिट पर 5 प्रतिशत से ज्यादा ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं।
आरबीआई ने जारी किया आदेश
आरबीआई से मिली जानकारी के मुताबिक अगर फिक्स्ड डिपॉजिट मैच्योर हो जाता है लेकिन निवेशक उसपर दावा नहीं कर रहा है तो उसपर मिलने वाले ब्याज दर को सेविंग्स अकाउंट के हिसाब से या मैच्योर्ड एफडी पर निर्धारित ब्याज दर के हिसाब से दिया जाएगा। यह ध्यान रहे कि सेविंग अकाउंड और मैच्योर्ड एफडी ब्याज दर में से जो कम रहेगा वह ही दर अप्लाई होगी।
नियम को समझे
मान लीजिए किसी निवेशक ने 5 साल की मैच्योरिटी पिरियड वाला फिक्स डिपॉजिट करवाया है,। अगर आज वह मैच्योर होने वाला है तो दो सिजुवेशन हो सकते हैं। या तो आप पैसा निकाल ले। दूसरा यदि आप पैसा नहीं निकाल पाते हैं तो अगर एफडी पर मिल रहा ब्याज उस बैंक के सेविंग अकाउंट पर मिल रहे ब्याज से कम है, तो आपको फिक्स डिपॉजिट पर मिलते रहने वाला ब्याज ही मिलता रहेगा। नहीं तो आपको सेविंग अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज मिलेगा।


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