FD Rate Calculations News: क्या आपने सोचा है कि अगर साल 365 की जगह 366 दिन का होगा तो आपको फिक्स्ड डिपॉजिट पर ज्यादा ब्याज मिलेगा। क्योंकि 4 साल में एक बार ऐसा जरूर होता है कि फरवरी में 29 दिन होते हैं और साल 366 दिन का हो जाता है। ऐसे साल को लीप ईयर बोलते हैं। क्योंकि इस साल में ज्यादा दिन है तो इसमें आम साल के मुकाबले फिक्स्ड डिपॉजिट पर ज्यादा इंटरेस्ट भी मिलना चाहिए, अगर आपके मन में ऐसे ही सवाल घूम रहे हैं, तो हम इस आर्टिकल में उसी का समाधान करने वाले हैं। इसके साथ ही हम आपको फिक्स्ड डिपॉजिट कैलकुलेशन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां भी देने जा रहे हैं, आइए देखते हैं।
अगर आप बात करते हैं घरेलू टर्म डिपॉजिट की तो यह टाइम पीरियड आमतौर पर 1 साल से ज्यादा ही होता है और इसमें टर्मिनल क्वार्टर पूरा नहीं होता है। आपको बताते चलें कि अगर साल 365 की 366 दिन का साल है तो फिर इंटरेस्ट का कैलकुलेशन ब्याज की गणना ऐसी जमाराशियां पूर्ण तिमाहियों और दिनों के क्रम में होनी चाहिए।

बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा दिए गए कुछ की प्वॉइंट्स के अनुसार 2 क्वार्टर या उससे अधिक के जमा के लिए, ब्याज को कंप्लीट क्वार्टर्स के लिए कैलकुलेट और कंपाउंड किया जाता है। इसके साथ ही जहां पर टर्मिनल क्वार्टर कंप्लीट नहीं होता है, ऐसी जगह पर इंटरेस्ट यानी ब्याज को दोनों की संख्या 365 या 366 दिन के आधार पर एक सही अनुपात में जोड़ा किया जाता है।
आपकी रसीद में लिखा हुआ मेच्योरिटी अमाउंट बिना किसी टीडीएस के जोड़ा जाता है। लेकिन आपने अगर 6 महीने के लिए पैसे जमा किए हैं, जो की क्वार्टरली कंपाउंडेड है, तो ऐसी स्थिति में इंटरेस्ट कैलकुलेट करते समय पिछले 6 महीने के इंटरेस्ट में से टीडीएस घटाकर प्रिंसिपल अमाउंट में ऐड कर दिया जाता है, इस तरह मौजूदा आधे साल का ब्याज कैलकुलेट किया जाता है।
अगर आपका सावधि जमा यानी फिक्स्ड डिपॉजिट एक क्वार्टर से ज्यादा है और दो क्वार्टर से कम है, तो आपको एक क्वार्टर के तो पूरे पैसे ब्याज सहित मिलेंगे, लेकिन बचे हुए क्वार्टर में जितने भी दिन होते (365 या 366) हैं, उनके हिसाब से ब्याज दिया जाएगा वहीं इस क्वार्टर में किसी भी तरह का कंपाउंड इंटरेस्ट नहीं मिलेगा।
कम अवधि जमा के लिए इसका समय एक क्वार्टर से भी कम होता है, उसके लिए इंटरेस्ट कैलकुलेशन साल के 365 या 366 दिन के आधार पर किया जाता है। क्योंकि ऐसी स्कीम में आपको हर दिन के हिसाब से ब्याज दिया जाता है।
अगर बात की जाए और स्मॉल फाइनेंस बैंक की तो इसमें भी ब्याज दर की कैलकुलेशन साल में मौजूद दिन के हिसाब से होती है। ऐसे में अगर साल 365 दिन का है, तो आपको उतने ही दिन का ब्याज मिलेगा और लीप ईयर में आपको 366 दिन का ब्याज मिलेगा। बैंक की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक डिपॉजिट की समय सीमा महीने और दोनों के नंबर पर कैलकुलेट की जाती है।
वहीं जना स्मॉल फाइनेंस बैंक में ब्याज दर को 1 साल में मौजूद दिन के आधार पर कैलकुलेट किया जाता है। तो ऐसी स्थिति में आपको 1 साल में 365 दिन का ब्याज मिलता है और एक लीप ईयर में 366 दिन का ब्याज मिलता है।
आपको बताते चलें की एफडी पर मिलने वाला इंटरेस्ट लीप ईयर में 366 दिन और नॉरमल ईयर में 365 दिन के आधार पर मिलता हैं। हालांकि कई एफडी के केस में ऐसा नहीं होता है। लेकिन ज्यादातर बैंकों के द्वारा लीप ईयर में 366 दिन के आधार पर ब्याज दिया जाता है।
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