Fastag Mandatory For Maharashtra: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली सरकार ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2025 से राज्य में सभी वाहनों के लिए फास्टैग अनिवार्य हो जाएगा। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। वाहन मालिकों को यह तय करना होगा कि इस तिथि तक उनके वाहन फास्टैग से लैस हों।

इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली फास्टैग केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के अनुसार नए चार पहिया वाहनों के लिए पहले से ही आवश्यक है। यह नियम 1 दिसंबर, 2017 से लागू है। हालांकि, महाराष्ट्र के नए शासनादेश ने इस जरूरत को राज्य के भीतर सभी वाहनों तक बढ़ा दिया है।
जांच और अनुपालन
फास्टैग को अनिवार्य बनाने के साथ ही महाराष्ट्र सरकार फास्टैग सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों के डेटाबेस को जांच करने की योजना बना रही है। यह जांच प्रक्रिया यह तय करेगी कि प्रत्येक फास्टैग का विवरण VAHAN डेटाबेस में मौजूद जानकारी से मेल खाता हो। सरकार का लक्ष्य इस प्रक्रिया को पूरा करना और डेटाबेस को सही तरीके से अपडेट करना है।
पूरे भारत में फास्टैग की शुरुआत का उद्देश्य टोल प्लाजा पर भीड़भाड़ को कम करना और इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह को बढ़ावा देना है। हालांकि, मोदी सरकार ने 1 जनवरी, 2021 से सभी चार पहिया वाहनों के लिए फास्टैग अनिवार्य कर दिया है, लेकिन अभी तक पूरे देश में इसका पूर्ण कार्यान्वयन नहीं हो पाया है।
टोल भुगतान विनियम
मौजूदा नियमों के अनुसार बिना फास्टैग वाले वाहनों को कुछ बूथों पर दोगुना टोल शुल्क देना होगा। यह नियम 1 अप्रैल से सख्ती से लागू किया जाएगा। ड्राइवरों को फास्टैग को अपने वाहन की विंडस्क्रीन पर लगाना होगा, न कि उसे अपने साथ लेकर चलना होगा या टोल बूथ पर जाते समय उसे अस्थायी रूप से लगाना होगा।
महाराष्ट्र में फास्टैग के इस्तेमाल को लागू करने का फैसला टोल संचालन को सही करने और राष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को बढ़ाने के अच्छे प्रयास को दर्शाता है। वाहन मालिकों को इस बदलाव के लिए तैयार होने के साथ ही यह तय करना चाहिए कि उनके वाहन निर्दिष्ट समय सीमा तक इन आवश्यकताओं को पूरा करें।
यह पहल पूरे भारत में परिवहन बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और टोल संग्रह प्रक्रियाओं में दक्षता में सुधार करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। सभी वाहनों के लिए फास्टैग को अनिवार्य करके महाराष्ट्र का लक्ष्य स्थानीय यातायात प्रबंधन चुनौतियों का समाधान करते हुए राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ तालमेल बिठाना है। सरकार का इस पहल को शुरू करने का खास उद्देश्य ये है कि सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों में दवाब न बनें।
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