भारत में कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत में लॉकडाउन को 17 मई तक बढ़ा दिया गया है। इसी बीच आपको बता दें कि देश में जनवरी-अप्रैल में नकदी का प्रसार तेजी से बढ़ा है।
नई दिल्ली: भारत में कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत में लॉकडाउन को 17 मई तक बढ़ा दिया गया है। इसी बीच आपको बता दें कि देश में जनवरी-अप्रैल में नकदी का प्रसार तेजी से बढ़ा है। जी हां बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता के बीच चालू कैलेंडर वर्ष के पहले चार महीनों में लोगों ने बड़े पैमाने पर अपने पास नकदी संभाल कर रखी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2019 में लोगों ने जितनी नकदी जमा की थी, उतनी ही रकम का अंबार 2020 के पहले चार महीनों में लगा लिया है।

देश में 2.66 लाख करोड़ रुपये मूल्य की नकदी प्रसार
मालूम हो कि इस वर्ष जनवरी से 1 मई के बीच देश में 2.66 लाख करोड़ रुपये मूल्य की नकदी प्रसार में थीं। वर्ष 2019 में जनवरी से दिसंबर के बीच नकदी प्रसार 2.40 लाख करोड़ रुपये बढ़ा था। वित्तीय तंत्र में अधिक नकदी ऐसे समय में आई है जब देश में आर्थिक गतिविधियां धड़ाम से गिरी हैं। आम तौर पर आर्थिक गतिविधियां बढऩे के साथ ही वित्तीय प्रणाली में नकदी का प्रसार बढ़ता है, क्योंकि लोगों को लेनदेन के लिए अधिक नकदी की जरूरत होती है। त्योहारों और चुनावों के दौरान भी नकदी की मांग बढ़ जाती है। फिलहाल न तो आर्थिक गतिविधियां तेज हैं और न चुनाव या त्योहारों का मौसम है। ऐसे में नकदी की मात्रा बढऩे का सीधा मतलब निकलता है कि लोग बैंकों में रकम जमा करने के बजाय बड़े पैमाने पर नकदी निकाल रहे हैं और उन्हें अपने पास रख रहे हैं।
बैंकों ने आरबीआई के पास 8.53 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी जमा की
वहीं अगर जानकारों की मानें तो यह स्थिति मोटे तौर पर आर्थिक अनिश्चितताओं की ओर इशारा करती है। हालांकि नकदी का प्रसार बढ़ना बैंकिंग नियामक आरबीआई के लिए एक कठिन चुनौती है। वहीं बैंकों ने मंगलवार को आरबीआई के पास 8.53 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी जमा की थी। इसकी वजह यह है कि बैंक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं, इसलिए ऋण आवंटित करने के बजाय मात्र 3.75 प्रतिशत ब्याज हासिल करने के लिए आरबीआई के नकदी रख रहे हैं। हालांकि अगर लॉकडाउन खत्म होता है और आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं तो लोग नकदी का इस्तेमाल बढ़ाएंगे और दोबारा बैंकों में इसे जमा करेंगे। इससे बैंकिंग प्रणाली में नकदी बढ़ जाएगी। बैंक आने वाले समय में उधारी देने में दरियादिली नहीं दिखाएंगे और न ही कंपनियां मौजूदा परिस्थितियों में अपने ऊपर कर्ज बोझ बढ़ाना चाहेंगी। बैंकों के पास लॉन्ग टर्म रीपो ऑपरेशंस (एलटीआरओ) के जरिये भी बड़ी मात्रा में रकम आई थ्थी। आरबीआई ने फरवरी और मार्च के बीच एलटीआरओ नीलामी के जरिये यह नकदी मुहैया कराई थी।
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