Budget 2024: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में इस बार फिर कुछ और राज्य भी शामिल हो सकते हैं इन राज्यों के शामिल होने की चर्चा ने तूल पकड़ लिया है। बिहार और नागालैंड समेत कई राज्य प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में शामिल होने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय से बातचीत कर रहे हैं। इस कदम का उद्देश्य सब्सिडी वाली फसल बीमा योजना की पहुंच को बढ़ाना है।

इससे पहले झारखंड और तेलंगाना ने इस योजना में भाग लेने का फैसला किया था। बिहार, उच्च प्रीमियम सब्सिडी लागत के कारण बाहर हो गया था, अब फिर से इसमें कोशिश कर रहा है। वित्त वर्ष 24 में नामांकन रिकॉर्ड मिलियन तक पहुंच गया और इस वित्तीय वर्ष में और वृद्धि होने की उम्मीद है। पंजाब ने पहले केवल कपास के लिए फसल बीमा लागू करने पर सहमति व्यक्त की थी।
भागीदारी में वृद्धि होने वाली है
एक अधिकारी ने कहा, राज्य के इस स्कीम में दोबारा शामिल होगा और अप्रत्याशित मौसम से होने वाली फसल हानि या क्षति से किसानों को मिलने वाली सुरक्षा के कारण मौजूदा स्कीम में किसानों के रजिस्ट्रेशन में तेजी से वृद्धि होगी।
अधिकारी ने कहा कि (PMFBY) ऋण-आधारित होने के बजाय सदस्यता-आधारित मॉडल की ओर बढ़ रहा है। जानकारी से पता चला कि 42 प्रतिशत ऐसे किसान हैं जिन्होंने बैंकों से लोन नहीं लिया था।
कवरेज विस्तार और वित्तीय प्रभाव
पिछले वित्त वर्ष में पीएमएफबीवाई के तहत कवरेज 61 मिलियन से अधिक हो गया, जो 2022-23 से 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 2016 में इसकी शुरुआत के बाद से किसानों ने प्रीमियम के अपने हिस्से के रूप में 32,440 रुपये का भुगतान किया है, जबकि लगभग 163 ट्रिलियन रुपये के दावों का वितरण किया गया है।
कृषि मंत्रालय के एक नोट में कहा गया है, किसानों द्वारा भुगतान किए गए प्रत्येक 100 रुपए के प्रीमियम पर उन्हें लगभग 500 रुपए दावे के रूप में प्राप्त हुए हैं।
योजना कार्यान्वयन और प्रीमियम वितरण
2016 में शुरू की गई पीएमएफबीवाई मौजूदा समय में 22 राज्यों और कई यूटी में चल रही है। किसान एक फिक्स्ड प्रीमियम दर का भुगतान करते हैं, रबी फसलों के लिए 15 प्रतिशत खरीफ फसलों के लिए 2 प्रतिशत और नकदी फसलों के लिए 5 प्रतिशत बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्यों द्वारा समान रूप से साझा किया जाता है। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह विभाजन केंद्र और राज्यों के बीच 9:1 के अनुपात में है। पीएमएफबी में भागीदारी किसानों के लिए वैकल्पिक बनी हुई है।
आंध्र प्रदेश, ओडिशा, मेघालय और पुडुचेरी जैसे राज्यों ने फसल के सार्वभौमिकरण को चुना है, जहां राज्य सरकारें किसानों के प्रीमियम को वहन करती हैं।
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