नयी दिल्ली। आम तौर पर किसानों की परेशानियों की खबरें ज्यादा सामने आती हैं। मगर एक शहर से किसानों के लाखों कमाने की खबर सामने आई है। किसान खेती के बजाय बागवानी से लाखों रु कमा रहे हैं। यानी उन्होंने परंपरागत तरीके से खेतों में फसल उगाने के बजाय बागों का रुख किया और चुनिंदा चीजों की बागवानी शुरू की, जिसका उन्हें फायदा भी मिल रहा है। ये किसान लाखों रु की कमाई अलावा बहुत से लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। लॉकडाउन से कड़े समय में लोगों को इन किसानों के बागों में काम मिल रहा है। आइये जानते हैं कहां के किसान हो रहे मालामाल।
रायपुर के किसान बढ़ रहे आगे
माना जाता है कि रायपुर के किसान बागवानी का शौक रखते हैं। मगर यही शौक उन्हें अच्छी कमाई करवा रहा है। ये किसान 3 मोर्चों पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनमें पहला है खुद भारी कमाई, दूसरा है कई लोगों को रोजगार देना और तीसरा है पर्यावरण को शुद्ध बनाना। खेतों में फसल के बजाय बागों में लगे पेड़ों से पर्यावरण की सफाई होती है। आइए जानते क्या उगा रहे हैं ये किसान।
इन चीजों की हो रही बागवानी
रायपुर के ये किसान पपीता, आम, अमरूद, कटहल और नींबू जैसे फलदार पौधे लगा रहे हैं। इन्हें ये अच्छी खासी मात्रा में लगाते हैं। इससे वे खुद भी कमाते हैं और साथ ही अपने परिवार का भी पोषण कर रहे हैं। नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार ये किसान रोजाना पचास से अधिक लोगों को काम भी देते हैं। कुल मिला कर इन किसानों की बागवानी के फल छत्तीसगढ़ सहित कई दूसरे राज्यों में भी पहुंच रहे हैं।
पहले करते थे खेती
कई किसानों के मुताबिक वे बागवानी से पहले खेत में धान की खेती करते थे। बाद में उन्होंने पर्यावरण के मद्देनजर पौधे लगाना और उसी से व्यापार शुरू कर दिया। पौधों से ही उनकी आर्थिक हालत में सुधार। एक किसान के अनुसार वे 45 एकड़ में पहले धान की खेती करते थे। मगर धान की खेती में बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ती है। बाद में उन्होंने फलों पर ध्यान देना शुरू किया और अपनी 45 एकड़ जमीन पर आम, नींबू, कटहल, मुनगा और केला लगाया। पौधों की अच्छी देखभाल से नतीजा यह हुआ कि उनके केले छत्तीसगढ़ से बाहर निकल कर दूसरे राज्यों में भी जाते हैं और वे रोज 50 लोगों को काम भी देते हैं।
कितनी होती है कमाई
केले की बागवानी करने वाले इस किसान की सालाना कमाई 10 लाख रु है। साथ ही पर्यावरण की सफाई भी हो रही है। एक अन्य किसान के अनुसार वे 100 एकड़ में अमरूद, आम, सीताफल, केला और पपीता लगाते हैं। उनके ये फल ओडिशा, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली तक पहुंचते हैं। अच्छी बात ये है कि उनके बाग में रोज 80 लोगों को काम मिलता है। उनकी सालाना बचत 40 लाख रुपये है। तीसरे किसान के अनुसार वे 40 एकड़ में बागवानी करके हर साल 32 लाख रु तक बचाते हैं।
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