नयी दिल्ली। गन्ना किसानों के लिए अच्छी खबर आई है। केंद्र ने गन्ना किसानों के लिए न्यूमतम खरीद मूल्य बढ़ाने का फैसला लिया है। चीनी मिलें गन्ना किसानों को 10 रु अधिक 285 रु प्रति क्विंटल का न्यूनतम भुगतान करेंगी। ये फैसला आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में लिया गया। बैठक में 2020-21 के मार्केटिंग वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का उचित और पारिश्रमिक मूल्य (एफआरपी) बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
खाद्य मंत्रालय का था प्रस्ताव
गन्ना किसानों के लिए एफआरपी बढ़ाने का प्रस्ताव खाद्य मंत्रालय ने रखा था। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सीसीईए ने गन्ना एफआरपी को मौजूदा 275 रुपये प्रति क्विंटल से 10 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ा कर मौजूदा 285 रुपये प्रति क्विंटल करने के खाद्य मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी), एक वैधानिक निकाय, की सिफारिश पर लिया गया, जो प्रमुख कृषि उपज के लिए मूल्य नीति पर सरकार को सलाह देता है। गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के तहत निर्धारित एफआरपी वे न्यूनतम मूल्य है जो चीनी मिलों को गन्ना किसानों को देना पड़ता है।
इन राज्यों का दाम केंद्र से ज्यादा
उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य अपने स्वयं के गन्ना मूल्य को 'राज्य सलाहकार मूल्य' (एसएपी) कहते हैं, जो आमतौर पर केंद्र के एफआरपी से अधिक होता है। एफआरपी में बढ़ोतरी लंबे समय से चला आ रहा एक प्रस्ताव था क्योंकि सरकार ने पिछले साल एफआरपी में कोई बदलाव नहीं किया था। सरकार का अनुमान है कि अगले महीने खत्म होने वाले चालू वर्ष (मार्केटिंग वर्ष) में देश का कुल चीनी उत्पादन 28-29 मिलियन टन होगा, जो 2018-19 के मुकाबले 33.1 मिलियन टन कम होगा। इसकी असल वजह महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की पैदावार में भारी गिरावट है।
किसानों का हजारों करोड़ रु बकाया
बता दें कि चीनी मिलों पर किसानों का हजारों करोड़ रुपये बकाया है, जिससे किसानों को एफआरपी बढ़ाने का तत्काल फायदा मिलने वाले पर सवाल खड़ा करता है। इससे पहले उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों ने राज्य सरकार से कैश सब्सिडी देने की मांग की थी ताकि वे गन्ना किसानों का बकाया चुका सकें। यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीबी पाटोदिया ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में कहा था कि गहरे संकट की इस घड़ी में वे सरकार से कैश सब्सिडी की उम्मीद करते हैं ताकि उद्योग को उबारा जा सके। उन्होंने कहा था कि इससे नकदी प्रवाह को बढ़ाने में मदद मिलेगी और पेराई कार्य और गन्ना मूल्य भुगतान जारी रहेगा।
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