नई दिल्ली, अगस्त 20। एक समय ऐसा था, जब लोग म्यूचुअल फंड के बारे में न ज्यादा जानते थे और न इसमें निवेश करना चाहते थे। मगर अब लोग इसमें जम कर निवेश करना पसंद करते हैं। इसकी एक वजह है की म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में तगड़ा रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। जैसे कि आईसीआईसआई प्रूडेंशियल वैल्यू डिस्कवरी फंड ने किया है। इस फंड ने लोगों को करोड़पति बना दिया है। आगे जानिए इस फंड की डिटेल।
2.5 करोड़ रु का फंड
आईसीआईसआई प्रूडेंशियल वैल्यू डिस्कवरी फंड ने को लॉन्च हुए 18 साल पूरे हो गए हैं। इस फंड ने 10 लाख रु के बार में किए गए निवेश को इन 18 सालों में 2.5 करोड़ रु में बदल दिया है। 18 सालों में फंड ने 19.7 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) के हिसाब से रिटर्न दिया और 10 लाख रु को 2.5 करोड़ रु बना दिया।
डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में निवेश
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वैल्यू डिस्कवरी फंड को 16 अगस्त 2004 को लॉन्च किया गया था। ये फंड उन शेयरों के डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में निवेश करता है, जिनका वैल्युएशन आकर्षक हो। मगर वे अपने वास्तविंक मूल्य से छूट पर ट्रेड कर रहे हों।
कितनी है एयूएम
इस योजना की एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 24,694 करोड़ है। ये एयूएम अपनी कैटेगरी में कुल एयूएम का लगभग 30% है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड का कहना है कि यह स्कीम में वैल्यू इनवेस्टर्स के अहम निवेशक भरोसे को दर्शाता है।
एसआईपी निवेश होता कितना
सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के लिहाज से देखें तो शुरुआत के बाद से एसआईपी के जरिए इस फंड ने हर महीने के 10,000 रु के मासिक निवेश को 31 जुलाई 2022 तक 1.2 करोड़ रु बना दिया है। ये सीएजीआर 17.3% का रिटर्न है। इस दौरान निवेशकों की कुल निवेश राशि 21.6 लाख रु रही, जबकि बाकी का सारा प्रोफिट।
इन बातों पर करें गौर
इक्विटी निवेशकों को एसआईपी या एकमुश्त के जरिए अपने निवेश को टॉप अप करते रहना चाहिए। शेयर बाजार ऐतिहासिक उच्च स्तर से अब भी काफी नीचे हैं। इसलिए निवेशकों के पास निवेश की लागत को एवरेज करने के लिए कम रेट पर नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) खरीदने का मौका है। आप एक सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) के जरिए निवेश करने के बारे में भी विचार कर सकते हैं, जिसमें एक लिक्विड स्कीम में आपके एकमुश्त निवेश को व्यवस्थित रूप से लक्ष्य योजना में ट्रांसफर किया जाता है। मौजूदा डेब्ट निवेशक या जो लोग डेब्ट में निवेश करना चाहते हैं, वे शॉर्ट टर्म डेब्ट फंड में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। इनमें ब्याज दर में उतार-चढ़ाव के कारण प्रभावित होने की संभावना कम होती है। निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि ब्याज दरों में वृद्धि का डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स के प्राइस के साथ विपरीत संबंध होता है। इसका सीधा सा मतलब है कि डेब्ट फंड उच्च ब्याज चक्र में खराब प्रदर्शन करते हैं। साथ ही आप क्रेडिट-रिस्क डेब्ट फंड से बच सकते हैं। एसेट एलोकेशन एक सफल निवेश की कुंजी है। अलग-अलग एसेट क्लास के वैल्युएशन के आधार पर, निवेशकों को डेब्ट और इक्विटी के बीच एसेट आवंटन सुविधाओं वाली योजनाओं पर अधिक फोकस करना चाहिए।
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