नयी दिल्ली। कोरोनावायरस के कारण भारत में सैकडो़ं लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग इससे संक्रमित हैं। वहीं विश्व में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या 1.18 लाख से अधिक हो चुकी है। भारत में कोरोनावायरस को अधिक फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने आज सुबह देश को संबोधित करते हुए लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने का ऐलान किया। मगर लॉकडाउन का असर इकोनॉमी पर पड़ेगा, क्योंकि इससे अधिकतर कारोबार बंद हैं जो 3 मई तक बंद ही रहेंगे। इस बीच ब्रिटिश ब्रोक्रेज फर्म बार्कलेज ने कहा है कि बढ़ाए गए लॉकडाउन से भारत की अर्थव्यवस्था को करीब 234.4 अरब डॉलर का नुकसान होगा। बार्कलेज के अनुसार इससे भारत की जीडीपी 2020 में स्थिर रहेगी। जहां तक विकास दर का सवाल है तो बार्कलेज ने कहा है कि 2020 में भारत की विकास दर शून्य रहेगी। इसने वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की विकास दर 0.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है।

पहली बार जीरो ग्रोथ रेट का अनुमान
ऐसा संभवत: पहली बार हुआ है कि भारत की विकास दर के शून्य रहने का अनुमान लगाया गया है। बार्कलेज ने पहले 2020 के लिए भारत की विकास दर 2.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। बार्कलेज ने एक नोट जारी कर बताया है कि भारत COVID-19 मामलों की बढ़ती संख्या का मुकाबला करने के लिए (3 मई तक) पूरी तरह लॉकडाउन में रहेगा, इसलिए इसका आर्थिक प्रभाव पहले की तुलना में और बदतर होना तय है। इससे पहले लॉकडाउन से भारतीय इकोनॉमी को 120 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया था।
भारत में स्टेज-2 में है कोरोना
भारत इस समय ऑफिशियली कह रहा है कि देश में कोरोनावायरस दूसरे स्टेज में ही है। इसका मतलब है कि यह अभी कम्युनिटी ट्रांसमिशन के लेवल तक नहीं पहुंचा है। मगर पूरे देश में लॉकडाउन के चलते इधर-उधर जाने पर प्रतिबंध हैं, जिससे इकोनॉमी को अनुमान से अधिक घाटा हो रहा है। जिन सेक्टरों पर लॉकडाउन का असर अधइक है उनमें खनन, एग्रीकल्चर और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर शामिल है।
बार्कलेज ने भी बताया है कि जारी किए अनुमानों के लिए माना गया है कि जून के पहले सप्ताह में लॉकडाउन खत्म हो जाएगा और इसके बाद सभी सेक्टरों में थोड़ी तेजी देखने को मिलेगी। मगर यदि स्थानीय लेवल पर कोरोना के मामले बढ़े और कई बार लॉकडाउन जरूरी हुआ तो अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की उम्मीद कम होती जाएगी।


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