कामयाबी की मिसाल : महिला ने 15 साल किया संघर्ष, आज Business से कमाई है लाखों में

नई दिल्ली, अगस्त 18। रंजीता सैकिया डेका ने अपने 15 साल के कारोबारी जीवन में भारी संकट का सामना किया। मगर कड़े संघर्ष के बावजूद, मछली पालन के अनोखे तरीके से वे आगे बढ़ने में कामयाब रहीं। वह रीसर्क्युलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) तकनीक का उपयोग करके भूमि आधारित मछली पालन शुरू करने वाली असम की पहली महिला हैं। उनके जीवन में कई उतार चढ़ाव आए। मगर वे टिकी रहीं। आगे जानिए आज उनकी कमाई कितनी है।

सकारात्मक मानसिकता से स्वीकारें स्थिति

सकारात्मक मानसिकता से स्वीकारें स्थिति

द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार रंजीता सैकिया डेका कहती हैं जीवन के अपने उतार-चढ़ाव होते हैं, चाहे जैसी भी स्थिति हो, हमें इसे सकारात्मक मानसिकता से स्वीकार करना चाहिए क्योंकि हर चुनौती एक अवसर है। बहुत ही कम आयु से, वह कुछ नया और अलग करना चाहती थीं। 2005 में, जब इंटरनेट अपने शुरुआती चरण में था, तब रंजीता ने इंटरनेट और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के बारे में जागरूकता पैदा करने का मिशन लिया और मुफ्त कक्षाएं देना शुरू कर दिया।

ऑनलाइन सर्विस की दुकान

ऑनलाइन सर्विस की दुकान

आखिरकार, उन्होंने धेमाजी जिले में एक ऑनलाइन सेवा की दुकान खोली। मार्च 2020 तक चीजें ठीक रहीं, लेकिन कोविड और उसके बाद के लॉकडाउन ने उन्हें एक साल से अधिक समय तक दुकान बंद करने के लिए मजबूर किया, जिसने वे आर्थिक रूप से प्रभावित हुईं। लेकिन रंजीता कभी भी आय के एक स्रोत पर निर्भर नहीं रहना चाहती थी। इसलिए, 2018 में ही उन्होंने एक्वापोनिक्स करना शुरू कर दिया।

यूट्यूब से मिली जानकारी

यूट्यूब से मिली जानकारी

एक दिन यूट्यूह पर स्क्रॉल करते हुए, रंजीता ने एक्वापोनिक्स पर एक वीडियो देखा और यहीं से उनके दिमाग में इस कारोबार का आइडिया आया। वे एक ही वातावरण में पूरी तरह से जैविक सब्जियां और मछली उगाने की तकनीक से रोमांचित हुईं। रंजीता का एक्वापोनिक्स बिजनेस एक बड़ी सफलता रही, और इसे देखते हुए मत्स्य विभाग ने 2017-18 में भारत की नीली क्रांति योजना के तहत इस हाई-टेक परियोजना को स्थापित करने के लिए उनसे संपर्क किया।

कई लोगों ने किया संपर्क

कई लोगों ने किया संपर्क

इस परियोजना की सफलता के बाद पिछले दो वर्षों में, असम और कई जहग के लोगों ने उनसे तकनीक के बारे में जानने के लिए संपर्क किया है। लेकिन केवल छह से सात लोग ही इस तकनीक को सफलतापूर्वक सीखा और लागू कर पाए हैं। आरएएस तकनीक के माध्यम से उत्पादित पूरी तरह से जैविक मछली भी काफी लागत प्रभावी है क्योंकि इसके लिए कम जगह और श्रम की आवश्यकता होती है। यह जल संरक्षण में भी बहुत मदद करता है। रंजीता के अनुसार 100 लीटर के तालाब में कोई 1 किलो का उत्पादन कर सकता है। हालांकि इस प्रक्रिया में 10 लीटर के टैंक में 1 किलो मछली आसानी से पैदा की जा सकती है।

कितनी है कमाई

कितनी है कमाई

वर्ष 2021 में, रंजीता की परियोजना का कुल कारोबार 11.25 लाख रुपये रहा और जून 2022 तक यह बढ़कर 14.8 लाख रुपये हो गया है। उन्हें उम्मीद है कि इस साल के अंत तक इसे 20 लाख रुपये तक पहुंचा दिया जाएगा। असल में धीरे-धीरे लेकिन लगातार, आरएएस का कारोबार असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के कोने-कोने में फैल रहा है।

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