रिपोर्ट जारी : SBI छोड़ सभी सरकारी बैंक हों प्राइवेट, ये है डिटेल

नई दिल्ली, जुलाई 15। जब से भाजपा की सरकार देश में बनी है तब से निजीकरण में तेजी बढ़ रही है। सरकार ने कुछ सालों पहले देश के तमाम बैंको का मर्जर किया था और अब सरकार जल्दी ही दो सरकारी बैंकों का निजीकरण करने की योजना बना रही है। सरकार ने बैंको को निजी कंपनियों को देने कि पूरी तैयारी कर ली है। सूत्रों की माने तो इस साल सितंबर तक प्राइवेटाइजेशन का प्रोसेस शूरू हो सकता है। सरकारी बैंको को प्राइवेट करने की खबर के बाद सरकारी कर्मचारियों ने हड़ताल करना भी शुरू दिया है। सरकार के इस कदम पर देश के अर्थशास्त्रीयों का कहना है कि सरकार को एसबीआई को छोड़कर सभी बैंको को प्राईवेट कर देना चाहिए।

सभी बैंक को प्राइवेट कर देना चाहिए

सभी बैंक को प्राइवेट कर देना चाहिए

देश में सरकारी बैंकों के निजीकरण का विरोध होना शुरू हो गया है। विरोध के बीच देश के दो बड़े अर्थशास्त्री का कहना है कि सरकार को एसबीआई को छोड़कर सभी पब्लिक सेक्टर बैंकों का निजीकरण कर देना चाहिए। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और नीति आयोग के पूर्व उपाध्‍यक्ष अरविंद पनगढिया और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाह समूह की सदस्य पूनम गुप्ता ने सरकार को यह सला दी है। पनगढ़िया और गुप्ता ने इंडिया पॉलिसी फोरम में पेश एक पॉलिसी पेपर में कहा है, सरकारी बैंकों का निजीकरण देश के हित में है। सभी बैंकों का निजीकरण हो जाने से भारतीय रिजर्व बैंक भी सबको समान नियम के तहत मॉनिटर कर पाएगा।

एसबीआई को नहीं करना चाहिए प्राइवेट

एसबीआई को नहीं करना चाहिए प्राइवेट

दोनो अर्थशास्त्रियों के पॉलिसि पेपर के अनुसार सरकार को आर्थिक और राजनीतिक ढांचा मजबूत करने के लिए अपने पास सरकारी क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक जरूर रखना चाहिए। रिपोर्ट में दोनों ने कहा है कि सरकार को भारतीय स्टेट बैंक को छोड़कर सभी बैंकों को प्राइवेट कर देना चाहिए। अगर सभी बैंकों के निजीकरण के बाद रिजल्ट अनुकूल दिखे तो सरकार को एसबीआई का भी निजीकरण कर देना चाहिए। अर्थशास्त्रियों के सुझाव पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।  

क्या सोचती है सरकार

क्या सोचती है सरकार

इस वर्ष का बजट पेश करते समय भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईडीबीआई बैंक समेत भारत के दो बैंकों का निजीकरण करने की बात कही थी। सरकार ने बैंक के अलावा नीति आयोग के प्राइवेटाइजेशन के लिए दो पब्लिक सेक्टर बैंक को शॉर्टलिस्ट भी कर दिया है। विपक्ष के लगातार विरोध के बावजूद सरकार अधिक से अधिक संस्थाओं का निजीकरण करना चाहती है। सूत्रों की मानें तो सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया और ओवरसीज बैंक का प्राइवेटाइजेशन हो सकता है।

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