Euro Pratik Sales का 451 करोड़ रुपए का आईपीओ 18 सितंबर को बंद हो गया। इस ऑफर को बाजार से उम्मीद के मुताबिक रिएक्शन नहीं मिला और तीन दिन तक सब्सक्रिप्शन का स्तर कमजोर ही रहा। पहले दिन सिर्फ 46% और दूसरे दिन 75% तक ही बुकिंग हुई थी। वहीं, आखिर दिन सुबह तक यह इश्यू केवल 88% सब्सक्राइब हो पाया।

निवेशकों का वर्गवार रुझान
रिटेल निवेशकों ने इसमें अच्छी दिलचस्पी दिखाई और उनका हिस्सा 96% तक भर गया। हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (NIIs) की कैटेगरी में आवेदन 1.45 गुना तक पहुंचा। लेकिन, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) की ओर से भरोसा कमजोर रहा और इस कैटेगरी में केवल 28% सब्सक्रिप्शन दर्ज हुआ।
GMP में गिरावट
इस इश्यू का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) भी निराशाजनक रहा। दूसरे दिन तक GMP लगभग 2.5% था, लेकिन आखिरी दिन यह घटकर सिर्फ 1.2% रह गया। यह संकेत है कि अनऑफिशियल मार्केट में लिस्टिंग गेन की उम्मीद बहुत ज्यादा नहीं है।
एंकर निवेश से मिला सहारा
IPO से पहले कंपनी ने 135 करोड़ रुपए एंकर निवेशकों से जुटाए थे। इस दौर में जाने-माने निवेशक अश्विन कचोलिया ने भी अपनी फर्म Bengal Finance के जरिए निवेश किया। इससे बाजार में भरोसा जरूर बढ़ा, हालांकि कुल मिलाकर रिस्पॉन्स सीमित ही रहा।
इश्यू का आकार और कीमत
Euro Pratik Sales ने शेयरों का प्राइस बैंड 235 से 247 रुपए तय किया है। यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) इश्यू है, यानी कंपनी को नई पूंजी नहीं मिलेगी और रकम प्रमोटर्स को जाएगी। अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब 2,524 करोड़ रुपए अनुमानित है।
कंपनी का बिजनेस और विस्तार
Euro Pratik Sales संगठित वॉल पैनल मार्केट में अग्रणी कंपनी है। FY24 में इसका मार्केट शेयर करीब 10% था। इसके पास 3,000 से ज्यादा डिजाइन और 30 प्रोडक्ट कैटेगरी हैं। कंपनी भारत के 25 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय है और अमेरिका, यूरोप, मिडल ईस्ट और अफ्रीका जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मौजूदगी रखती है।
वित्तीय प्रदर्शन के लिहाज से FY25 में कंपनी की इंकम 28% बढ़कर 284 करोड़ रुपए रही और नेट प्रॉफ़िट 77 करोड़ रुपए तक पहुंचा। EBITDA मार्जिन 35.7% और ROE 32.8% रहा। हालांकि, इसकी 55% खरीद विदेशी मुद्रा में होती है, जिससे करेंसी रिस्क हमेशा बना रहता है।
निवेशकों के लिए निष्कर्ष
आईपीओ का वैल्यूएशन इंडस्ट्री औसत से ज्यादा है, लेकिन मजबूत मुनाफे और बेहतर मार्जिन इसे लंबी अवधि के निवेश के लिए आकर्षक बना सकते हैं। शॉर्ट टर्म लिस्टिंग गेन की संभावना कम है, इसलिए इस इश्यू पर नजर रखने वाले निवेशकों को इसे लॉन्ग टर्म व्यू से देखना चाहिए।
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