EU Sanction on Russia: रूस पर यूरोपीय संघ के देशों ने लगाए नए प्रतिबंध, यूक्रेन से युद्ध रोकने के लिए दबाव

EU Sanction on Russia: यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोपीय संघ (EU) के देशों ने रूस पर नए प्रतिबंधों का एक पैकेज मंजूर किया है. इस पैकेज में मास्को के ऑयल एक्सपोर्ट पर प्राइस लिमिट को कम करना भी शामिल है. स्लोवाकिया की ओर से रूसी गैस आयात को फेजवाइज तरीके से समाप्त करने की योजनाओं पर ब्रुसेल्स के साथ बातचीत के बाद हफ्तों से जारी विरोध को वापस लेने के बाद यह फैसला लिया गया.

रूस पर बैन पैकेज का ऐलान

ईयू के विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा कि यूरोपीय संघ ने रूस के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों के पैकेजों में से एक को मंजूरी दी है. उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रतिबंध रूस की युद्ध करने की क्षमता को कमजोर करता है. उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यूरोप यूक्रेन के समर्थन में पीछे नहीं हटेगा और जब तक रूस अपना युद्ध समाप्त नहीं कर देता, तब तक यूरोपीय संघ दबाव बढ़ाता रहेगा.

रूस के प्रति अनुकूल रुख रखने वाले स्लोवाकिया के नेता रॉबर्ट फिको ने ब्रुसेल्स से गैस की कीमतों पर "गारंटी" मिलने के बाद अपना विरोध वापस ले लिया. दरअसल, यूरोपीय संघ 2027 के अंत तक रूसी आयात को पूरी तरह से बंद करने का प्रयास कर रहा है. फ्रांस ने कहा कि यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर लगाए गए यूरोपीय संघ के नए प्रतिबंध अभूतपूर्व हैं और मास्को को युद्धविराम के लिए मजबूर करेंगे.

सीजफायर के लिए बना रहे दबाव

फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मिलकर वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्धविराम के लिए मजबूर करेंगे. उन्होंने कहा कि नए प्रतिबंधों में रूसी तेल निर्यात पर कम मूल्य सीमा शामिल है, जो अभूतपूर्व है. इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस के युद्ध कोष को खाली करना है.

कूटनीतिज्ञों के मुताबिक यूरोपीय संघ ने तीसरे देशों को निर्यात किए जाने वाले रूसी तेल पर मूल्य सीमा को बाजार मूल्य से 15% कम करने पर सहमति व्यक्त की है. यह फैसला तब आया है जब यूरोपीय संघ के सहयोगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को इस योजना पर सहमत कराने में विफल रहे. यह मूल्य सीमा जी7 की एक पहल है जिसका उद्देश्य चीन और भारत जैसे देशों को तेल निर्यात करके रूस द्वारा कमाए जाने वाले धन की मात्रा को सीमित करना है.

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G7 को ऑयल एक्सपोर्ट पर रोक लगाने की कोशिश

जी7 द्वारा 2022 में निर्धारित 60 डॉलर की तेल मूल्य सीमा का उद्देश्य दुनिया भर में तेल बेचने की मास्को की क्षमता को सीमित करना है. इसके तहत रूसी तेल के साथ काम करने वाली शिपिंग और बीमा कंपनियों पर उस राशि से ऊपर निर्यात करने पर प्रतिबंध लगाया गया है. नई यूरोपीय संघ योजना के तहत, जिसे ब्रिटेन और कनाडा जैसे जी7 सहयोगियों का समर्थन मिलने की उम्मीद है. नई कीमत 47.6 डॉलर से शुरू होगी और भविष्य में तेल की कीमतों में बदलाव के अनुसार इसे समायोजित किया जा सकता है.

अधिकारियों ने बताया कि यूरोपीय संघ रूस द्वारा तेल निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए उपयोग किए जाने वाले पुराने टैंकरों के "शैडो फ्लीट" में 100 से अधिक जहाजों को ब्लैकलिस्ट कर रहा है. इसके अलावा बाल्टिक सागर गैस पाइपलाइन नॉर्ड स्ट्रीम 1 और 2 को फिर से चालू होने से रोकने के उपाय भी किए जा रहे हैं.

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