ETF Vs Mutual Fund: आज के समय में निवेश के कई विकल्पों से ETF और म्यूचुअल फंड्स स्कीम भी शामिल हैं। इन स्कीमों में लगातार लोगों की भागीदारी बढ़ती जा रही है, क्योंकि इनमें अन्य निवेश स्कीमों के मुकाबले अधिक रिटर्न मिलने की संभावना होती है।

हालांकि, कई बार लोगों को यह कन्फ्यूजन होता है कि ETF या म्यूचुअल फंड्स स्कीम में से कौन बेहतर है? किसमें निवेश करना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है? सबसे अहम सवाल कि इन दोनों निवेश विकल्पों को चुनने के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? यदि आपको भी कंफ्यूजन है और इस उलझन को शांत करना चाहते हैं तो चलिए फटाफट जानते हैं इनसे जुड़े तमाम सवालों के जवाब...
ETF (Exchange Traded Fund) क्या है?
ETF एक ऐसा निवेश ऑप्शन है जो स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर की तरह ट्रेड होता है। यह किसी इंडेक्स (जैसे Nifty 50, Sensex, Gold Index आदि) को फॉलो करता है। ETF को खरीदने या बेचने के लिए आपके पास एक डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट होना चाहिए। स्टॉक मार्कट के ट्रेडिंग सेशन में आप कभी भी किसी भी एटीएफ में ट्रेड कर सकते हैं। इसमें किसी कंपनी के शेयरों की तरह ही रियल टाइम में प्राइस घटता-बढ़ता रहता है। ETF की खासियत यह है कि इसमें एक्सपेंस रेशियो बहुत कम (0.05% - 0.5%) होता है।
Mutual Fund क्या है?
म्यूचुअल फंड भी एक निवेश ऑप्शन है, लेकिन इसमें आपके फंड को मैनेज करने के लिए एक फंड मैनेजर होता है। यानी जब आप किसी म्यूचुअल फंड के स्कीम में पैसा डालते हैं तो फंड मैनेजर अपने विवेक और समझ के हिसाब से उस पैसे को अलग-अलग शेयरों, बॉन्ड्स या अन्य सिक्योरिटीज में निवेश करता है। इसके अनुसार ही आपको रिटर्न मिलता है।
म्यूचुअल फंड स्कीम की खरीद-बिक्री दिन के अंत में NAV (Net Asset Value) के आधार पर होता है। यानी खरीदने पर आपको इसमें NAV मिलता है और बेचने पर आप NAV बेचते हैं। इसमें हर कारोबारी दिन में एक बार NAV तय होता है। इसमें निवेश के लिए आपके पास ट्रेडिंग अकाउंट का होना जरूरी नहीं है, बल्कि केवल KYC के बाद आप निवेश कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड में एक्सपेंस रेशियो थोड़ा ज्यादा (1% - 2%) होता है।
मुख्य अंतर (ETF vs Mutual Fund)
| तुलनात्मक पॉइंट | ETF | Mutual Fund |
| खरीदने का तरीका | शेयर बाजार में रियल टाइम | AMC (Asset Management Company) के जरिए |
| NAV / Price | मार्केट में लगातार बदलता है | दिन में एक बार तय होता है |
| एक्सपेंस रेशियो | बहुत कम | अपेक्षाकृत ज्यादा |
| Liquidity (तरलता) | बहुत हाई - तुरंत बेच सकते हैं | बेचने में 1-3 दिन लगते हैं |
| निवेश की सुविधा | Trading & Demat जरूरी | SIP या Lump Sum दोनों संभव |
| मैनेजमेंट | Passive (Index आधारित) | Active (Fund Manager द्वारा) |
| जोखिम और नियंत्रण | मार्केट उतार-चढ़ाव पर निर्भर | Fund Manager की रणनीति पर निर्भर |
निवेश के समय किन बातों पर रखें ध्यान?
- निवेश का उद्देश्य - क्या आप लॉन्ग टर्म ग्रोथ, ट्रेडिंग या नियमित निवेश (SIP) चाहते हैं?
- रिस्क प्रोफाइल - ETF कम खर्चीले हैं पर पूरी तरह मार्केट जोखिम पर निर्भर जबकि Mutual Fund में Diversification बेहतर होता है।
- Liquidity की जरूरत - अगर आप तुरंत खरीद-बिक्री करना चाहते हैं तो ETF बेहतर निवेश ऑप्शन है।
- सुविधा - अगर आप नए निवेशक हैं और Demat अकाउंट नहीं है तो Mutual Fund निवेश के नज़रिए से आसान है।
- एक्सपेंश रेशियो - निवेश के समय एक्सपेंस रेशियो का ध्यान रखें। ETF में म्यूचुअल फंड के मुकाबले कम एक्सपेंस रेशियो होता है।
- टैक्सेशन - दोनों पर कैपिटल गेन टैक्स के नियम समान हैं (लॉन्ग टर्म पर छूट की सीमा 1 लाख रुपये तक)।
कौन ज्यादा फायदेमंद है?
- शुरुआती निवेशक के लिए Mutual Fund (SIP से शुरुआत करें) बेहतर विकल्प है।
- अनुभवी/ट्रेडिंग जानने वाले निवेशक के लिए ETF अच्छा ऑप्शन है।
- कम खर्च और पारदर्शिता चाहने वाले निवेशकों के लिए भी ETF बेहतर निवेश ऑप्शन है।
- प्रोफेशनल मैनेजमेंट चाहने वालों के लिए Mutual Fund स्कीम में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद है।
[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]
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