नई दिल्ली, 12 मार्च। पीएफ खाताधारकों के लिए एक बुरी खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भविष्य निधि यानी पीएफ जमा पर ब्याज दर में कटौती कर दी है। ये ब्याज दर घटा कर 8.1 प्रतिशत कर दी गयी है, जो वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 8.5 फीसदी थी। यह 4 दशक से अधिक की अवधि में सबसे कम ब्याज दर है। इस फैसले वेतनभोगी वर्ग के 6 करोड़ से अधिक ग्राहकों को निराश होगी। बता दें कि ईपीएफओ ने 2020-21 में अपने लाखों ग्राहकों को 8.5 प्रतिशत ब्याज दर का भुगतान किया। इसकी ईपीएफ दर 2019-20 में 8.5 फीसदी, 2018-19 में 8.65 फीसदी और 2017-18 में 8.55 फीसदी थी।
जानिए पहले की ब्याज दरें
ईपीएफओ ने 2016-17 में 8.65 फीसदी और 2015-16 में 8.8 फीसदी का भुगतान किया। पिछली बार ईपीएफ की ब्याज दर वित्त वर्ष 2011-12 में वित्त वर्ष 2021-22 की दर के काफी करीब थी। तब सेवानिवृत्ति निधि निकाय ने अपने ग्राहकों को 8.25 फीसदी दर का भुगतान किया था। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार सीबीटी के एक सदस्य ने कहा है कि केंद्रीय बोर्ड ने अपनी 76,768 करोड़ रुपये की इनकम को ध्यान में रखते हुए 8.1 प्रतिशत ब्याज दर घोषित की है।
ईपीएफओ करता है निवेश
ईपीएफओ अपने पास आने वाले पैसे का 85 फीसदी सरकारी प्रतिभूतियों और बॉन्डों सहित डेब्ट उपकरणों में और 15 फीसदी पैसा इक्विटी में ईटीएफ के माध्यम से निवेश करता है। डेब्ट और इक्विटी दोनों से होने वाली आय का उपयोग ब्याज भुगतान की गणना के लिए किया जाता है। ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2021-22 के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में से 12,785 करोड़ रुपये के इक्विटी निवेश को निकाल लिया है। इसमें से यह ईपीएफ ब्याज भुगतान के लिए लगभग 5,529 करोड़ रु के पूंजीगत लाभ का उपयोग करेगा।
1977-78 में ब्याज दर
ईपीएफओ ने 1977-78 में ब्याज दर के रूप में 8.0 फीसदी पीएफ ग्राहकों के खाते में जमा किया था। तब से यह या तो 8.25 फीसदी या उससे अधिक रही है। मगर अब शनिवार को गुवाहाटी में ईपीएफओ की बोर्ड बैठक में ट्रेड यूनियनों के काफी विरोध के बाद यह फैसला लिया गया। ईपीएफओ या सीबीटी का केंद्रीय न्यासी बोर्ड एक त्रिपक्षीय निकाय है जिसमें सरकार, कर्मचारी और नियोक्ता (कंपनियां या एम्प्लोयर) के प्रतिनिधि शामिल होते हैं और सीबीटी का निर्णय ईपीएफओ पर बाध्यकारी होता है।
श्रम मंत्री होते हैं अध्यक्ष
इसकी अध्यक्षता श्रम मंत्री करते हैं। हालांकि, वित्त मंत्रालय को अधिसूचित होने से पहले सीबीटी द्वारा घोषित ब्याज दर की समीक्षा करनी होगी। ब्याज आय अधिसूचित होने के बाद ग्राहकों के खाते में जमा हो जाती है। वित्त मंत्रालय भविष्य की जमाराशियों पर ब्याज दर कम करने और उन्हें अन्य छोटी बचत योजनाओं के बराबर लाने के लिए श्रम मंत्रालय पर दबाव बना रहा है।
क्या है ईपीएफओ
ईपीएफओ भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत आने वाला एक वैधानिक निकाय है, जो भारत में भविष्य निधि के विनियमन और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। ईपीएफओ भविष्य निधि का प्रबंधन करता है। यह अन्य देशों के साथ सामाजिक सुरक्षा समझौतों का भी प्रबंधन करता है। जिन देशों में द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, वहां अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों को ईपीएफओ योजनाओं के तहत कवर किया जाता है।
More From GoodReturns

नया मल्टी-एसेट NFO: SIP या एकमुश्त, निवेश से पहले ये 5 बातें जरूर जानें

Sugar Stocks: चीनी की कीमतों में आग, इन 7 शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग की दमदार रणनीति

EMI और क्रेडिट कार्ड बिल: सोमवार को बैंक अकाउंट में रखें बैलेंस, वरना कटेगा भारी जुर्माना

Tempsens Instruments IPO: आज से खुला निवेश का मौका, जानें प्राइस बैंड और लॉट साइज की पूरी डिटेल

Airtel का बड़ा झटका: अचानक बंद हुए कई लोकप्रिय प्रीपेड प्लान, रिचार्ज से पहले जानें ये जरूरी बात

जियो नेटफ्लिक्स बिलिंग में अचानक बदलाव! कहीं आपका प्लान तो नहीं हुआ डाउनग्रेड? चेक करें तुरंत

₹399 से कम में अनलिमिटेड 5G और OTT का तड़का, Jio, Airtel और Vi के बेस्ट प्लान्स की पूरी सच्चाई

भारत बनाम श्रीलंका मैच: लाइव स्ट्रीमिंग में बफरिंग? ₹22 से शुरू हैं ये बेस्ट डेटा प्लान्स

Kotak Diversified Equity All Cap NFO: आज बंद हो रहा है निवेश का मौका, क्या आपको दांव लगाना चाहिए?

PMFBY खरीफ 2026: आज है रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन, बैंक बंद होने पर भी ऐसे करें आवेदन

Shiprocket Listing Today: शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री! क्या ₹120 के पार खुलेगा भाव?



Click it and Unblock the Notifications