EPF : कर्मचारी कर सकते हैं 10 फीसदी से ज्यादा योगदान

नयी दिल्ली। श्रम मंत्रालय ने कहा कि कर्मचारी अपने प्रोविडेंट फंड (पीएफ) खाते में अगले तीन महीनों के लिए बेसिक सैलेरी के 10 प्रतिशत की नई निर्धारित सीमा से अधिक योगदान कर सकते हैं। हालांकि एम्प्लोयर्स (कंपनी) को कर्मचारी की तरफ से किए गए अधिक योगदान की बराबरी करने की जरूरत नहीं होगी। जानकारी के लिए बता दें कि सैलेरी पाने वाले कर्मचारियों के हाथ में अधिक पैसे पहुंचाने और एम्प्लोयर्स पर कर्मचारियों के लिए ईपीएफ योगदान का बोझ घटाने के लिए 13 मई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पीएफ योगदान नियमों में ढील दी थी। सरकार ने ये फैसला 6,750 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी सहायता प्रदान करने के लिए लिया था। इस फैसले के तहत वैधानिक पीएफ योगदान को अगले 3 महीनों के लिए 12 फीसदी से घटा कर 10 फीसदी कर दिया जाएगा। मगर अब सरकार ने साफ किया है कि कर्मचारी 10 फीसदी से अधिक योगदान कर सकते हैं।

सरकारी कर्मचारियों के लिए कटौती नहीं

सरकारी कर्मचारियों के लिए कटौती नहीं

हालांकि सरकार ने साफ किया था कि ईपीएफ योगदान रेट में कमी केंद्रीय और राज्यों की सरकारी कंपनियों पर लागू नहीं होगी। सरकारी कर्मचारियों के लिए ईपीएफ योगदान 12 फीसदी ही बरकरार रहेगा। पीएफ योगदान घटाने के साथ ही सरकार ऐसी कंपनियों, जिनमें कर्मचारियों की संख्या 100 तक है और उनमें से 90 फीसदी की मासिक सैलेरी 15000 रु से कम है, में पीएम गरीब कल्याण पैकेज के तहत अगस्त तक कंपनी और कर्मचारियों की तरफ से ईपीएफ योगदान देगी। सरकार की इस योजना से 3.67 लाख कंपनियों को फायदा मिलेगा।

बढ़ सकती है टैक्स देनदारी

बढ़ सकती है टैक्स देनदारी

मालूम हो कि अब दो टैक्स सिस्टम हैं। नए टैक्स सिस्टम में सेक्शन 80सी के तहत आपको टैक्स बेनेफिट नहीं मिलेगा, मगर आप कम टैक्स रेट का लाभ ले सकते हैं। इसलिए, भले ही आर्थिक पैकेज के अनुसार आपका ईपीएफ योगदान 12% से कम होकर 10% हो, इससे आप पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मगर यदि आप पुराने टैक्स सिस्टम में बरकरार रहेंगे तो वित्त मंत्री की पीएफ योगदान कम करने की घोषणा से 2020-21 के लिए सेक्शन 80सी के तहत आपकी निवेश राशि कम हो जाएगी। इसका मतलब है कि आपकी टैक्स देनदारी बढ़ेगी।

अधिक टैक्स से कैसे बचें

अधिक टैक्स से कैसे बचें

जैसा कि सरकार ने बताया कि आप अपना योगदान 12 फीसदी बरकार रख सकते हैं। तो पहला ऑप्शन तो आपके पास यही है। इसके अलावा वीपीएफ (Voluntary Provident Fund) में योगदान करके अपनी निवेश राशि बढ़ा सकते हैं। इससे पुराने टैक्स सिस्टम के तहत आपका ज्यादा टैक्स बचेगा। वीपीएफ पर ईपीएफ के बराबर ही ब्याज मिलता है। आप एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) में भी निवेश कर सकते हैं। इसमें भी आपको टैक्स कटौती का फायदा मिलेगा।

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