नई दिल्ली, मई 7। गुजरात में जीएसटी अधिकारियों की तरफ से बिना अथार्टी के कारोबारी की ट्रक और एययूवी को सीज करने को माननीय गुजरात उच्च न्यायालय ने डकैती जैसा अपराध बताया है। कोर्ट ने यह प्रतिक्रिया उस वक्त दी जब गुजरात के मोरबी के एक कारोबारी राकेश सरस्वडिया ने अपनी याचिका दायर कर राहत की गुहार लगाई। जीएसटी अधिकारियों ने इस कारोबारी को माल के एक ट्रक के साथ 16 फरवरी 2021 को हिरासत में लिया था।
यह था घटनाक्रम
घटनाक्रम के अनुसार जीएसटी के एक सहायक आयुक्त ने व्यापारी राकेश सरसावदिया की तरफ से बकाया कर भुगतान न करने पर, व्यवसायी के ट्रक को माल सहित जब्त कर लिया। इसके बाद जीएसटी अधिकारियों ने इस कारोबारी का उत्पीड़न शुरू कर दिया। जीएसटी फ्लाइंग स्क्वाड ने इस कारोबारी को अहमदाबाद के जीएसटी कार्यालय में बुलाया और राजकोट और मोरबी में व्यवसायी के ठिकानों पर छापा मारने से पहले उसकी एसयूवी, 7 मोबाइल फोन और 3 डायरियों को जब्त करने के साथ ही इस कारोबारी को 2 दिनों के लिए हिरासत में ले लिया।

फिर कारोबारी ने लगाई कोर्ट से गुहार
इसके बाद इस व्यवसायी ने अपनी एसयूवी और मोबाइल फोन को रिलीज कराने के लिए गुजरात उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर व्यवसायी की तरफ से देय टैक्स का भुगतान करने के बाद उसका ट्रक छोड़ दिया गया।
बाद में न्यायधीशों को पता चली पूरी बात
बाद में माननीय न्यायाधीशों को पता चला कि जब्ती सहायक आयुक्त (संयुक्त आयुक्त की रैंक से नीचे के अधिकारी) की तरफ से की गई है और वह भी तब जब वह जीएसटी अधिनियम के प्रावधान के तहत यह अधिकारी अधिकृत नहीं है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि जब्ती बनाने वाले अधिकारी के साथ क्या किया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि सवाल यह है कि कौन छापा मार सकता है और कौन जब्ती कर सकता है? अगर कोई छापेमारी करने के लिए अधिकृत नहीं है और मेरे घर में जब्ती हो रही है, तो यह गलत है। यह एक डकैती है। अगर पांच से अधिक लोग किसी घर में गैरकानूनी तरीके से घुसते हैं, तो यह सरासर डकैती है।


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