नई दिल्ली, अगस्त 27। म्यूचुअल फंड योजनाएं निवेशकों को उनके लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए बचत करने में मदद कर रहे हैं। इन लक्ष्यों में घर खरीदना, बच्चों की शिक्षा, शादी और यहां तक कि उनका खुद का रिटायरमेंट शामिल है। जब रिटायरमेंट के लिए बचत की बात आती है तो विभिन्न म्यूचुअल फंड योजनाओं में से इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) की एक विशेष जगह रहती है। यहां हम आपको रिटायरमेंट के लिए ईएलएसएस फंड के फायदों के बारे में बताएंगे।
टैक्स बेनेफिट मिलेगा
ईएलएसएस एक ऐसी म्यूचुअल फंड योजना है जो धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स बेनेफिट के साथ आती है और इसमें तीन साल की सबसे कम लॉक-इन अवधि होती है। ईएलएसएस में निवेश की गई राशि डिडक्शन के योग्य होती है और इस प्रकार निवेशक के टैक्स स्लैब के आधार पर उसकी टैक्स देनदारी कम हो जाती है।
अधिक रिटर्न की उम्मीद
ईएलएसएस मुख्य रूप से एक इक्विटी फंड होता है जिसमें कम से कम 80 फीसदी पैसा इक्विटी में निवेश किया जाता है। यह देखा गया है कि लंबी अवधि में, इक्विटी ऊपर की ओर बढ़ती है और मुद्रास्फीति को एडजस्ट करने के बाद अन्य एसेट क्लास की तुलना में अधिक रिटर्न दिलाती हैं। ईएलएसएस एक बढ़िया ऑप्शन है, मगर फिर आपको अपने जोखिम प्रोफाइल पर ध्यान देना है। इनमें शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म में वोलैटिलिटी ज्यादा होती है।
एसआईपी की सुविधा
कोई व्यक्ति ईएलएसएस में एकमुश्त (एक बार में बड़ी राशि) निवेश कर सकता है या एक एसआईपी भी शुरू कर सकता है। इससे आपको रुपये-लागत औसत का लाभ मिल सकता है। हालांकि, एसआईपी की प्रत्येक एसआईपी किस्त में 36 महीने की लॉक-इन अवधि होगी। इससे आप न केवल टैक्स बचाते हैं बल्कि अपने निवेश को लंबी अवधि के लक्ष्य की ओर बढ़ने देते हैं। जानकार सलाह देते हैं कि अपने सभी निवेशों को एक लक्ष्य से जोड़ें और ईएलएसएस निवेश को अपने रिटायरमेंट की ओर निर्देशित करें।
2.7 करोड़ रुपये का फंड
यदि आपका रिटायरमेंट 20, 25 या 30 वर्ष दूर है, तो प्रत्येक वर्ष ईएलएसएस में निवेश किए गए 1 लाख रुपये से 12 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि मानकर क्रमशः लगभग 80 लाख रुपये, 1.5 रुपये और 2.7 करोड़ रुपये का फंड बनाया जा सकता है।
इस बात का रखें ध्यान
2-3 ईएलएसएस में निवेश करके अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाएं और सुनिश्चित करें कि आपके पास अलग-अलग मार्केट कैपिटल और विभिन्न उद्योगों वाली योजनाओं में निवेश हो। ईएलएसएस में 3 साल की लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद, आप निवेश बरकरार रख सकते हैं और फंड को और अधिक बढ़ने दे सकते हैं। इसके अलावा, एसआईपी को आपकी रिटायरमेंट तक चलने दें। जब आप रिटायरमेंट से 3-5 साल दूर हों, तो ईएलएसएस फंड की वैल्यू को डेब्ट फंड में ट्रांसफर करना शुरू कर दें, ताकि इस फंड पर जोखिम को तम किया जा सके। डेब्ट में जोखिम नहीं होता है। आप एकमुश्त या एसआईपी के माध्यम से जो पैसा निवेश करते हैं, वह आपकी रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों के लिए पेंशन प्राप्त करने के साधन के रूप में काम करेगा।
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