Edible Oil : उत्पादन बढ़ाने का ये है मोदी सरकार का मास्टर प्लान, जानें डिटेल

नयी दिल्ली। भारत खाद्य तेलों पर आयात कर (Import Tax) बढ़ाने पर विचार कर रहा है। इस योजना के पीछे सरकार का मकसद टैक्स रेवेन्यू की मदद से स्थानीय तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर बनना है। टैक्स बढ़ोतरी से वनस्पति तेलों के दुनिया के सबसे बड़े आयातक यानी भारत की खरीद पर अंकुश लग सकता है। इससे सोया और सूरजमुखी तेल की कीमतों के साथ मलेशियाई पाम तेल पर भी दबाव बढ़ेगा। साथ ही सफेद सरसों, सोयाबीन और मूंगफली जैसे तिलहन की स्थानीय कीमतों में बढ़ोतरी होगी। भारत वर्तमान में कच्चे और रिफाइंड पाम तेल पर क्रमश 37.5 फीसदी और 45 फीसदी आयात कर लगाता है। कच्चे सोयाबीन तेल, कच्चे सूरजमुखी तेल और सफेद सरसों तेल के आयात पर 35 फीसदी आयात शुल्क लगता है।

खाद्य तेल के आयात पर सालाना 10 अरब डॉलर खर्च

खाद्य तेल के आयात पर सालाना 10 अरब डॉलर खर्च

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार खाद्य तेल पर कुछ टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो इस फंड का इस्तेमाल देश में उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाएगा। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार टैक्स में 5 फीसदी की वृद्धि की जा सकती है, लेकिन यह निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत खाद्य तेलों के आयात पर हर साल लगभग 10 अरब डॉलर खर्च करता है। भारत की खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता 2001/02 में 44 फीसदी से बढ़ कर 70 फीसदी हो गई है।

आत्मनिर्भर भारत के तहत कदम

आत्मनिर्भर भारत के तहत कदम

ये कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करने और स्थानीय उत्पादन का समर्थन करने के लिए फंड जुटाने की दिशा में है। इसके लिए सरकार ने खाद्य तेल आयात कम करने के लिए इंडस्ट्री से विचार भी मांगे हैं। इंडस्ट्री की तरफ से तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए कई उपाय सुझाए भी गए हैं। व्यापार निकाय ने आयात करों को बढ़ाने और उस पैसे का उपयोग उपजाऊ उत्तर भारत में तिलहन रोपण को लोकप्रिय बनाने के लिए करने की सिफारिश की थी, जहां किसान मुख्य रूप से चावल और गेहूं पसंद करते हैं।

कितना है भारत का उत्पादन

कितना है भारत का उत्पादन

भारत में सफेद सरसों, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसे तिलहनों की खेती मुख्य रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में की जाती है, जबकि सुरक्षित सिंचाई वाले किसान गेहूं और चावल पसंद करते हैं, जो सरकार उनसे जन कल्याण योजनाओं के लिए निर्धारित मूल्य पर खरीदती है। भारत सालाना लगभग 1.5 करोड़ टन खाद्य तेलों का आयात करता है, जिसमें 90 लाख टन से अधिक पाम तेल और लगभग 25 लाख टन प्रत्येक सोया तेल और सूरजमुखी तेल शामिल हैं। देश में इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल आयात किया जाता है। अन्य तेल, जैसे कि सोया और सूरजमुखी का तेल अर्जेंटीना, ब्राजील, यूक्रेन और रूस से आयात किया जाता है।

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