नयी दिल्ली। लॉकडाउन में ढील के बावजूद भारत में पिछले महीने व्यापार और निवेश गतिविधियों में गिरावट बढ़ी है। अर्थव्यवस्था के प्रमुख 8 संकतकों में से अधिकतर कमजोरी का संकेत दे रहे हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर आउटपुट से लेकर निर्यात में मंदी है। वहीं आईएमएफ (इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड) ने इस साल भारत की जीडीपी में 4.5 फीसदी की गिरावट कआ अनुमान लगाया है, जबकि अप्रैल में 1.9 फीसदी ग्रोथ का अनुमान लगाया था। बता दें कि गोल्डमैन सैक्स ने भारत की जीडीपी में 5 फीसदी और ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स ने 10.6 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं अर्थव्यवस्था के संकेतक।

बिजनेस एक्विटी और निर्यात
भारत के प्रमुख सेवा क्षेत्र में गतिविधियों में अप्रैल के मुकाबले मई में थोड़ा सुधार दिखा, मगर ये अर्थव्यवस्था में रिकवरी के लिए पर्याप्त संकेत नहीं है। मुख्य सर्विस इंडेक्स 5.4 से 12.6 तक पहुंचा है। वहीं मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 30.8 पर रहा। लॉकडाउन में बढ़ोतरी और बहुत कमजोर मांग के कारण आउटपुट भी तेजी से घटा। वहीं मई में निर्यात पिछले साल इसी महीने के मुकाबले 36.5 फीसदी की गिरावट के साथ 19.1 अरब डॉलर रह गया। नॉन-ऑयल निर्यात में इस दौरान 30.1 फीसदी की गिरावट आई।
कंज्यूमर एक्टिविटी
उपभोक्ता, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारशिला है, ने इनकम और नौकरियों के नुकसान के डर से खर्च कम किया। खुदरा स्टोरों पर उपभोक्ताओं में मई में लगभग 30 फीसदी की गिरावट आई। ऑटो बिक्री, जिसे अर्थव्यवस्था में मांग का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है, अप्रैल में शून्य बिक्री दर्ज करने के बाद मई में थोड़ी बढ़ी। इसके अलावा बैंक क्रेडिट अप्रैल में 6.8 फीसदी से गिर कर मई में 5.5 फीसदी रह गई, जो पिछले साल मई में 13.5 फीसदी रही थी। बकाया बैंक क्रेडिट अप्रैल में 102.7 लाख करोड़ रु से घट कर मई में 102.2 लाख करोड़ रु के रह गए।
औद्योगिक गतिविधियां
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक अप्रैल में तेजी से गिरा, क्योंकि तब लॉकडाउन से अधिकांश औद्योगिक क्षेत्र बंद थे। भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर उद्योग आउटपुट एक साल पहले की तुलना अप्रैल में रिकॉर्ड 38.1% घटा। वे क्षेत्र जो औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 40% योगदान देते हैं उनमें मार्च में 9% की गिरावट आई थी।


Click it and Unblock the Notifications