Economic Survey : क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों पर उतारा गुस्सा

नई दिल्ली। भारत की अच्छी सॉवरेन रेटिंग देने में हमेश ही क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाती हैं। इस बार आर्थिक सर्वे में भी इस बात का उल्लेख किया गया है। इस सर्वे में मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि क्रेडिट रेटिंग भारत की इकोनॉमी की बुनियादी स्थिति को नहीं देखती हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार सॉवरेन रेटिंग एजेंसी ने विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को इंवेस्टमेंट के लिए माइनस बीबीबी रेटिंग दी है। यह उनके पक्षपातपूर्ण रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कई संकेतक इस बात की पुष्टि करते हैं, साथ ही यह भी कहा कि सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को अपने मेथडोलॉजी में सुधार करना और इसे अधिक पारदर्शी बनाना चाहिए, जिससे जिससे भेदभाव न किया जा सके।

Economic Survey

आज पेश हुआ है आर्थिक सर्वेक्षण

संसद में आज आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया है। इसमें जहां चालू वित्तीय वर्ष में जीडीपी में गिरावट की बात है, वहीं अगले साल रिकार्ड 11 फीसदी से ज्यादा जीडीपी बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। इसी आर्थिक सर्वेक्षण में रेटिंग एजेंसियों की मनमान की बात भी कही गई है।

तेजी से बढ़ रही जीडीपी

मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने कहा कि भारत की सभी नीतियां इस बात पर आधारित थीं कि अर्थव्यवस्था में ग्रोथ को दोबारा लाया जा सके। इसीलिए शुरुआत में ही कड़ाई से लॉकडाउन लगाया गया, जिससे महामारी नियंत्रण में आई और बाद में अर्थव्यवस्था फिर से बढ़ने लगी। उन्होंने कहा सरकार ने कोविड-19 से एकजुट होकर मुकाबला किया और फिर अनलॉक में डिमांड को बढ़ावा देने वाले कदमों का ऐलान किया गया। मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने कहा कि लॉकडाउन के बगैर भी कोविड-19 का अर्थव्यवस्था पर बहुत अधिक असर देखने को मिलता, लेकिन लॉकडान की वजह से को-ऑर्डिनेटेड रेस्पांस देखने को मिला। इससे लोगों के जीवन और आजीविका को बचाने में मदद मिली।

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