नई दिल्ली, जनवरी 31। आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट से पहले इकोनॉमिक सर्वे पेश किया। सर्वे के अनुसार तीसरी लहर के बावजूद भारत में खपत में बढ़ोतरी की कहानी बरकरार है। सर्वे के अनुसार 2021-22 में खपत में 7.0 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जिसमें सरकारी खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आपको बता दें कि सर्वे में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के अच्छी स्थिति में होने का एक कारण इसकी अनूठी प्रतिक्रिया रणनीति (यूनीक रेस्पोंस स्ट्रेटेजी) है। कठोर रेस्पोंस के लिए पहले से प्रतिबद्ध होने के बजाय भारत सरकार ने कमजोर वर्गों की सुरक्षा करने का विकल्प चुना, जबकि सूचना के बायेसियन-अपडेशन के आधार पर रेस्पोंस दिया। पिछले साल के आर्थिक सर्वेक्षण में इस "बारबेल रणनीति" पर चर्चा की गई थी।

सप्लाई पर किया फोकस
भारत के रेस्पोंस (खपत के लिए) की एक और विशिष्ट विशेषता पूरी तरह डिमांड मैनेजमेंट पर निर्भरता के बजाय सप्लाई साइड के सुधारों पर जोर देना है। इन सुधारों में कई क्षेत्रों का विनियमन, प्रक्रियाओं को आसान बनाना, 'पूर्वव्यापी कर' जैसे पुराने मुद्दों को हटाना, निजीकरण, उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन आदि शामिल हैं। इन सभी पर विस्तार से चर्चा की गई है।
फ्यूचर ग्रोथ का रास्ता
सर्वे के अनुसार सरकार द्वारा पूंजीगत खर्च में तेज वृद्धि को मांग और आपूर्ति बढ़ाने वाली प्रतिक्रिया दोनों के रूप में देखा जा सकता है क्योंकि यह भविष्य के विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेसिटी तैयार करता है। बता दें कि इस वर्ष के सर्वे में विशेष रूप से कई क्षेत्रों में प्रोसेस रिफॉर्म्स के महत्व पर प्रकाश डाला गया है, जबकि आर्थिक विकास का आकलन करने के लिए सैटेलाइट इमेजेस और जियो-स्पेक्टिकल डेटा का एक संक्षिप्त प्रदर्शन प्रोवाइड किया गया है।
एयर इंडिया का निजीकरण
सर्वे में एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन का जिक्र किया गया। एयर इंडिया का निजीकरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। ये न केवल विनिवेश से प्राप्त होने वाली राशि के मामले में बल्कि निजीकरण अभियान को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार के लिए कारगर रहा। चालू वर्ष में बजटीय राजकोषीय घाटा अधिक वास्तविक रहा, क्योंकि इसने कई ऑफ-बजट आइटमों को बजट आवंटन के भीतर लाने में मदद की।


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