नई दिल्ली, जनवरी 31। संसद में केंद्रीय बजट 2022 को पेश किए जाने से एक दिन पहले सरकार ने आज वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) ग्रोथ के संशोधित आंकड़े पेश किए। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2020-21 में 6.6 प्रतिशत घटी है, जबकि पहले के अनुमानों में 7.3 प्रतिशत गिरावट दिखायी गयी थी। कॉन्स्टैंट प्राइस (2011-12) पर साल 2020-21 और 2019-20 के लिए वास्तविक जीडीपी या जीडीपी क्रमशः 135.58 लाख करोड़ रुपये और 145.16 लाख करोड़ रुपये रही, जो 2020-21 के दौरान 6.6 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाती है। वहीं 2019-20 के दौरान 3.7 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि सामने आई है।

सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का टैग रहेगा बरकरार
केंद्र सरकार की तरफ से वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने के बाद इन आंकड़ों की घोषणा हुई। प्रधान आर्थिक सलाहकार (पीईए) संजीव सान्याल ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के अपने टैग को बरकरार रखेगा। इसके पीछे कारण उन्होंने बतााया कि इकोनॉमी को सपोर्ट करने के लिए फिस्कल स्पेस है और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए इकोनॉमी अच्छी तरह से तैयार है।
इकोनॉमी में सुधार
लगातार दो तमाहियों में नकारात्मक जीडीपी वृद्धि के कारण अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2021 में अपनी पहली तकनीकी मंदी का अनुभव किया था। हालांकि कोविड वैक्सीन और कोरोना संक्रमण मामलों में गिरावट के साथ सरकार ने प्रतिबंधों में ढील देना शुरू कर दिया और कारोबारी गतिविधि ने गति पकड़ ली। नतीजतन, भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में अब तक की सबसे अच्छी 20.1 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर्ज की। इसके बाद, आर्थिक सुधार ने स्थिर गति बनाए रखी है। आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हुए सान्याल ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अपने महामारी से पहले के स्तर को पार कर चुकी है और 2022-23 की चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी तरह से तैयार है। सरकार द्वारा जारी जीडीपी के पहले एडवांस्ड अनुमानों में वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की अर्थव्यवस्था के 9.2 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान लगाया गया था।


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