Economic Survey 2022 : इकोनॉमी में रहेगी 'W' आकार की रिकवरी

नई दिल्ली, फरवरी 1। अंग्रेजी अल्फाबेट के 'वी' आकार और फिर 'के' आकार के बाद भारत की अर्थव्यवस्था महामारी के बाद की स्थिति की व्याख्या करने के लिए एक और अल्फाबेट पर की तरफ इशारा कर रही है - 'डब्ल्यू' आकार की रिकवरी। या फिर एक थोड़ा हिलता हुआ डब्लू, क्योंकि यदि प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल के बयान पर नजर डालें तो सूचकांकों में तब हर बार गिरावट आती है, जब कोरोना संक्रमण के मामलो में तेजी आती है। इसके बाद फिर से एक तेजी शुरू होती है।

indian GDP

कैसी है इकोनॉमी की हालत
आज केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। उससे पहले सोमवार को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वे में अर्थव्यवस्था के फुल रिकवरी मोड में पहुंचने की बात सामने आई है। मगर अभी भी तेल की कीमतों से लेकर मुद्रास्फीति तक के वैश्विक कारकों से ये पटरी से उतर सकती है। सर्वे में चालू वित्तीय वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के 9.2 प्रतिशत की ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है। आने वाले वित्तीय वर्ष 2022-23 में भी इसके 8-8.5 प्रतिशत के मजबूत बैंड में रहने की उम्मीद जताई गई है। इसका अर्थ है कि भारत वित्तीय वर्ष 2023 में दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था हो सकता है।

स्थिति हो रही बेहतर
सर्वे में आर्थिक गतिविधियों के स्थिर रिवाइवल, निर्यात में तेजी, डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स में वृद्धि और विदेशी मुद्रा भंडार के शानदार स्तर पर पहुंचने की बात कही गयी है। सान्याल ने कहा कि भारत की मुद्रास्फीति अभी भी बर्दाश्त की जाने वाली सीमा के भीतर है। मगर थोक मुद्रास्फीति हाल ही में तीन दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी है। आगे तेल की बढ़ती कीमतें केवल भविष्य की चिंताओं को बढ़ाएंगी। इसके अलावा सप्लाई साइड के झटके जैसे कंटेनर चार्ज में वृद्धि, चिप की कमी और कमोडिटी साइकिल भी इसे और बढ़ा सकती हैं।

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