
Economic Survey : इकोनॉमिक सर्वे 2022-23 में कहा गया है कि भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की तरफ से किए गए। जो त्वरित और पर्याप्त उपाय है। इसने मुद्रास्फीति (महंगाई) में बढ़ोतरी में लगाम लगाई है और इसको आरबीआई ने सहनशीलता के भीतर लाया है। जो मानसून है। इस मानसून ने भी पर्याप्त खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता की।
उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति साल 2022 में तीन चरणों में गुजरी है
इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है। कि देश की उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति साल 2022 में तीन चरणों में गुजरी है। अप्रैल 2022 तक एक बढ़ती हुई। अवस्था जब यह 7.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसके बाद यह साल 2022 में लगभग 7 प्रतिशत पर होल्डिंग पेंशन फिर इसके बाद इसमें गिरावट आई। दिसंबर 2022 तक यह करीब 5.7 प्रतिशत रही। वृद्धि की वजह काफी हद तक रूस-यूक्रेन युद्ध के वजह से और भारत के कुछ हिस्सों में अधिक गर्मी के वजह से फसल की कटाई है। इसमें कमी के वजह था। देश के कुछ हिस्सों में काफी अधिक गर्मी इसके बाद कुछ हिस्सों में असमय बारिश ने जो कृषि क्षेत्र है। इन क्षेत्रों को प्रभावित किया। जिस कारण आपूर्ति कम हो गई और कुछ उत्पाद है। जिनकी कीमतें बढ़ गई।
कोरोना के बाद के समय में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आनी शुरू हो गई
इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि कोरोना महामारी के समय के दौरान डब्ल्यूपीआई आधारित जो मुद्रास्फीति हैं। यह कम रही और कोरोना महामारी के बाद के समय में आर्थिक गतिविधियों के फिर से शुरू हो गई, तो इसमें फिर से शुरू होने पर इसमें भी तेजी आनी शुरू हो गई।
फाइनेंशियल ईयर 2012 में थोक मुद्रास्फीति यह दर 13.0 प्रतिशत तक चढ़ गई
इस बोझ को रूस - यूक्रेन युद्ध ने और बढ़ा दिया क्योंकि इसकी वजह से जरूरी वस्तुओं की फ्री आवजाही के साथ-साथ जो ग्लोबल सप्लाई चेन है। यह भी बिगड़ गई। इसके परिणाम स्वरूप, फाइनेंशियल ईयर 2012 में थोक मुद्रास्फीति की जो दर है। यह दर 13.0 प्रतिशत तक चढ़ गई। डब्लूपीआई अपने मई 2022 में 16.6 प्रतिशत अपने जो चरम है। इससे गिरकर 2022 में 10.6 प्रतिशत आ गया था। इसके बाद यह दिसंबर 2022 में गिर गई और यह गिरकर 5 प्रतिशत हो गया।


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