मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा आम बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा। बेरोजगारी का बढ़ता स्तर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख चिंताओं में से एक है।
नई दिल्ली: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा आम बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा। बेरोजगारी का बढ़ता स्तर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख चिंताओं में से एक है। आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 कहता है कि भारत को युवाओं के लिए अद्वितीय रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए चीन जैसे विकास मॉडल का अनुसरण करना चाहिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन द्वारा तैयार सर्वे में सरकार को 5 साल में 4 करोड़ रोजगार देने का चाइनीज फॉर्मूला सुझाया गया है।

जानकारी दें कि सर्वे में कहा गया है कि मेक इंडिया इंडिया अभियान में 'असेंबलिंग इन इंडिया फॉर वर्ल्ड' को शामिल रोजगार और एक्सपोर्ट पर ध्यान देने से 2025 तक अच्छी तनख्वाह वाली 4 करोड़ और 2030 तक 8 करोड़ नौकरियां दी जा सकती हैं। इससे 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी के लक्ष्य तक तेजी से बढ़ना भी संभव होगा। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने चीन और भारत के एक्सपोर्ट के आंकड़ों में फर्क बताते हुए कहा कि चीन कामगारों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देता है। भारत को भी ऐसा करने की जरूरत है। आर्थिक विकास दर को लेकर अनुमान है कि आने वाले वित्त वर्ष (2020-21) में जीडीपी ग्रोथ बढ़कर 6-6.5 फीसदी पहुंच सकती है। चालू वित्त वर्ष (2019-20) में ग्रोथ रेट 5% रहने का ही अनुमान है। यह 11 साल में सबसे कम होगी।
वहीं सर्वे में कहा गया है कि ग्लोबल ग्रोथ में कमजोरी से भारत भी प्रभावित हो रहा है। फाइनेंशियल सेक्टर की दिक्कतों के चलते निवेश में कमी की वजह से भी चालू वित्त वर्ष में ग्रोथ घटी। लेकिन, जितनी गिरावट आनी थी आ चुकी है। अगले वित्त वर्ष से ग्रोथ बढ़ने की उम्मीद है।सर्वे में यह भी कहा गया कि प्याज जैसी कमोडिटी की कीमतों में स्थिरता लाने के लिए सरकार के उपाय प्रभावी साबित होते नहीं लग रहे। सर्वे में कहा गया है कि 2011-12 से 2017-18 के दौरान ग्रामीण और शहरी इलाकों में रोजगार के 2.62 करोड़ मौके बढ़े। इस दौरान महिलाओं के रोजगार में 8% इजाफा हुआ। कच्चा माल सस्ता होने से चालू खाता घाटा कम हुआ, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में एक्सपोर्ट की तुलना में इंपोर्ट कम हुआ। अप्रैल 2019 में महंगाई दर 3.2% से घटकर दिसंबर 2019 में 2.6% रह जाने से पता चलता है कि मांग में कमी की वजह से अर्थव्यवस्था दबाव में है।
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