नयी दिल्ली। आज के समय में डिग्री के दम पर आपको जॉब मिल जाएगी इस बात की कोई गारंटी नहीं है। मौजूदा हालात को देखते हुए तो नौकरी का ख्याल भी थोड़ा टेंशन देने वाला है, क्योंकि कोरोना संकट से करोड़ों लोगों की नौकरी पहले ही चली गई है। बड़ी संख्या में लोगों को कंपनियों ने छुट्टी पर भेज दिया और कितनों को सैलेरी में कटौती का सामना करना पड़ा। नई नौकरी भी मिलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में डिग्री पास होने से नौकरी की उम्मीद धुंधली हो गई है। कुछ ऐसा ही एक व्यक्ति के साथ हुआ जिसने मास्टर डिग्री हासिल की मगर नौकरी नहीं मिली। इस शख्स ने 1 नहीं बल्कि 5-5 एमए की डिग्री हासिल की थीं। नौकरी न मिलने पर उसने हार नहीं मानी बल्कि गोबर से पैसा कमाना शुरू किया। जी हां सुनने में ये बात थोड़ी अटपटी लग सकती है, मगर ये सच है। आइए जानते हैं इस शख्स की पूरी कहानी।
छत्तीसगढ़ का है ये व्यक्ति
ये कहानी छत्तीसगढ़ के गोरेलाल साहू नामक व्यक्ति की है, जिन्होंने गोबर से कमाई शुरू की। दरअसल छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने हाल ही में 'गोधन न्याय योजना' एक योजना शुरू की थी। इसी योजना के दम पर अब गोरेलाल हर महीने हजारों रु कमा रहे हैं। उनके पास एमए के अलावा आईटीआई डिप्लोमा भी है, मगर ये उन्हें नौकरी दिलाने के लिए नाकाफी रहा। इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार की गोधन न्याय योजना के जरिए गोबर से पैसा कमाना शुरू किया। अब वे रोज 300 रु यानी हर महीने करीब 9000 रु कमाते हैं।
कौन-कौन सी डिग्रियां हासिल कीं
गोरेलाल ने एमए की जो 5 डिग्रियां हासिल कीं उनमें राजनीति शास्त्र, हिंदी साहित्य, समाज शास्त्र शामिल हैं। उन्होंने आईटीआई से एक नहीं दो बार डिप्लोमा (इलेक्ट्रीशियन और वेल्डर) भी हासिल किया। मगर उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिल पाई। मगर राज्य सरकार की ये योजना उनकी कमाई का माध्यम बन गई। अब उन्होंने अपनी कमाई से एक नई स्कूटी भी खरीदी है। वे इसी स्कूटी के जरिए गोबर ढोते हैं और हर महीने 9000 रु कमात हैं। वे एक दिन में 150 किलो तक गोबर बेचते हैं। पहले उन्हें साइकिल पर गोबर ढोना पड़ रहा था।
खूब हो रही वाहवाही
गोरेलाल की इस मेहनत का वाहवाही मीडिया के साथ साथ खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी की है। हालांकि उनकी शुरुआत थोड़ी मुश्किल भरी रही। क्योंकि वे सड़कों से गोबर उठा कर बेचते थे। इसलिए लोग उन्हें इसके लिए बुरी बातें भी कहते थे। मगर उन्होंने हार नहीं मानी और आज गोधन न्याय योजना से अपने लिए जीवन जीने लायक आजीविका हासिल करने का जरिया पा लिया।
क्या है गोधन न्याय योजना
गौरतलब है कि पिछले महीने छत्तीसगढ़ सरकार ने गोधन न्याय योजना को मंजूरी दे दी थी। राज्य की कैबिनेट ने भी इस योजना के प्रस्ताव को पारित कर दिया था। आपको बता दें कि इस योजना के तहत सरकार पशु पालकों से गोबर खरीदती है। इसके लिए उन्हें 2 रु प्रति किलो (टांसपोर्ट शुल्क सहित) का शुल्क दिया जाता है। गोरलाल रोज करीब 150 किलो गोबर बेच कर 300 रु रोज यानी हर महीने 9000 रु कमा रहे हैं।
सरकार क्या करती है गोबर का
राज्य में बने हुए गोठानों में गाय और भैंस पशु पालकों से गोठान समितियों के जरिए गोबर खरीदा जाता है। इससे वर्मी कम्पोस्ट और अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिससे जैविक खेती का विस्तार होता है। इस योजना से ग्रामीण और शहरी इलाकों के लोगों को रोजगार मिल रहा है। या कम से पशुपालक अपनी इनकम बढ़ा रहा हैं।
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