नयी दिल्ली। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने बुधवार को अधिसूचित किया है कि 1 जनवरी 2021 से 100 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले करदाताओं के लिए बिजनेस 2 बिजनेस (बी2बी) लेन-देन के लिए इलेक्ट्रॉनिक चालान (E-Invoice) या ई-चालान जरूरी होगा। इस समय ई-चालान उन कारोबारों के लिए जरूरी है जिनका कारोबार 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक है। इसकी भी शुरुआत 1 अक्टूबर 2020 से की गई है। विभिन्न सरकारी अधिकारियों से बातचीत के बाद ई-चालान को अब 100 करोड़ रुपये और उससे अधिक टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए भी जरूरी किया गया है। इतने टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए लगभग 50 और दिन हैं, जिसके बाद उनके लिए ई-चालान जरूरी होगा। इस दौरान इन कंपनियों नियमों का पालन करने में सक्षम होने के लिए अपने प्रोसेसेस / आईटी सिस्टम को तैयार करना होगा।

ई-वे बिल सिस्टम की जगह लेगा
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने वित्त सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा था कि ई-चालान फिजिकल चालान की जगह ले रहा है और जल्द ही मौजूदा ई-वे बिल सिस्टम को बदल देगा और फिर करदाताओं को अलग ई-वे बिल जनरेट करना नहीं पड़ेगा। सरकार को उम्मीद है कि ई-चालान के कई अन्य प्रमुख फायदे भी होंगे। जैसे कि उद्योग के लिए पेमेंट साइकिल में सुधार और एमएसएमई को चालान-आधारित लोन को बढ़ावा मिल सकता है।
रोजाना 8 लाख ई-चालान हो रहे जारी
वित्त सचिव ने हाल ही कहा था कि पहले कुछ दिनों में प्रतिदिन लगभग 8 लाख ई-चालान जारी किए गए। उन्होंने कहा कि ताजा आंकड़े उम्मीदों से बेहतर हैं। 1 अक्टूबर से 7 अक्टूबर के बीच 69.5 लाख से अधिक चालान संदर्भ संख्या (Invoice Reference Numbers) या आईआरएन जनरेट हुए।
कितनी थी उम्मीद
केवल 500 करोड़ रु या इससे ज्यादा के कारोबारों के लिए जरूरी होने के चलते सरकार ने 20-21 लाख आईआरएन जनरेट होने की संभावना जताई थी, जिसमें करीब 18000 कंपनियां कवर होती। हालांकि 30 अक्टूबर तक 29 लाख से अधिक ई-चालान जारी हुए।


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