Dream11 and BCCI end jersey sponsorship: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सोमवार को बताया कि बोर्ड और Dream11 अपना 358 करोड़ रुपये का जर्सी स्पॉन्सरशिप डील खत्म कर रहे हैं। फैंटेसी खेल दिग्गज ड्रीम 11, जिसने हाल ही में केंद्र सरकार के संसद में 'ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 के पारित करने के बाद अपने पैसे वाले खेल बंद कर दिए है। इसके बाद अब BCCI ने बताया कि अब भारतीय क्रिकेट टीम स्पॉन्सरशिप जारी नहीं रख पाएगा। क्योंकि इससे रेवेन्यू बुरी तरह प्रभावित होने वाला है।

यह सब भारतीय टीमों के एशिया कप 2025 और ICC महिला विश्व कप 2025 की तैयारी से ठीक पहले आया है, जो दोनों सितंबर में शुरू होंगे। एशिया कप 2025 यूएई में 9 सितंबर से शुरू होगा, जबकि महिला विश्व कप 30 सितंबर से गुवाहाटी में शुरू होगा।
BCCI ने स्पॉन्सरशिप डील खत्म करने पर क्या कहा?
BCCI सचिव देवाचित सैकिया ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि क्रिकेट बोर्ड भविष्य में ऐसे संगठनों के साथ कोई संबंध नहीं रखेगा। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन और रेगुलेशन बिल, 2025 के पारित होने के बाद BCCI और ड्रीम 11 अपने संबंध समाप्त कर रहे हैं।
बीसीसीआई यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऐसे किसी भी संगठन के साथ कोई संबंध न रहे। BCCI के एक अधिकारी ने बताया कि एशिया कप में ज्यादा समय नहीं बचा है, लेकिन हम विकल्प तलाश रहे हैं। सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार का नया बिल, रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म के प्रचार, विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप पर बैन लगाता है। इससे ड्रीम11 के लिए टीम इंडिया की जर्सी स्पॉन्सरशिप बने रहना मुश्किल हो जाता है।
Dream11 और BCCI की डील
ड्रीम11 ने 2023 में बीसीसीआई के साथ तीन साल का समझौता किया था और यह भारत के सबसे बड़े विज्ञापनदाताओं में से एक है। इसकी मूल कंपनी, ड्रीम स्पोर्ट्स ने वित्त वर्ष 23 में विज्ञापन और प्रचार पर लगभग 2,964 करोड़ रुपये खर्च किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 37% अधिक है।
कई प्रीमियर लीग टीमों का स्पॉन्सरशिप
Dream11 कई इंडियन प्रीमियर लीग टीमों का मुख्य स्पॉन्सरशिप है और कैरेबियन प्रीमियर लीग का आधिकारिक फैंटेसी पार्टनर भी है। यह न्यूजीलैंड की घरेलू टी20 प्रतियोगिता- सुपर स्मैश का टाइटल स्पॉन्सरशिप भी है। ड्रीम11 ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग का भी स्पॉन्सरशिप है।
फैंटेसी प्लेटफॉर्म पर सलाना इतना खर्च
इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म मार्केटिंग पर सालाना 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करते हैं। नए कानून से इस विज्ञापन में भारी बदलाव आने की उम्मीद है।
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