1400 रु का सिक्का, मगर बिका 138 करोड़ रु में, जानिए क्या है खासियत

नई दिल्ली, जून 14। आपने भी सुना होगा कि 'ओल्ड इज गोल्ड'। मगर क्या आपने कभी इस फॉर्मुले को आजमाया है? अगर नहीं तो यहां हम आपको ऐसी ही घटना की जानकारी देंगे, जिसमें यह कहावत एक दम फिट बैठती है। आपको देखा होगा कि कुछ लोग पुराने सिक्के और नोट या डाक टिकट जमा करते हैं। ऐसी पुरानी चीजें जितनी अधिक पुरानी होती जाती हैं, उतनी ही इनकी कीमत बढ़ती जाती है। बल्कि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो पुराने सिक्के और नोट बेच कर रातोंरात मालामाल हो जाते हैं। भारत में पुराने सिक्कों की वैल्यू बहुत अधिक होती है। अब एक ऐसा ही सिक्का अमेरिका में बिका है, जिसकी कीमत 100 करोड़ रु से भी अधिक रही। जानते हैं कि इस सिक्के की डिटेल।

88 साल पुराना सिक्का

88 साल पुराना सिक्का

कुछ दिन पहले न्यूयॉर्क में एक नीलामी में 1933 का डबल ईगल वाला सोने का सिक्का रिकॉर्ड 1.89 करोड़ डॉलर में बिका। भारतीय मुद्रा में देखें तो यह रकम 138 करोड़ रुपये हो जाती है। बता दें कि ये सिक्का मात्र 20 डॉलर का था। भारतीय मुद्रा में आज के रेट से हिसाब से भी यह सिक्का 1400-1500 रु के आस-पास का होता। मगर बावजूद इसके लगभग 138 करोड़ रु में खरीदा गया।

कहां हुई नीलामी

कहां हुई नीलामी

इस सिक्के की नीलामी न्यू यॉर्क शहर के सोथबी में हुई। जूते के डिजाइनर और कलेक्टर स्टुअर्ट वीट्ज़मैन ने इस सिक्के को बेचा। उन्होंने इसे 2002 में 76 लाख डॉलर (55 करोड़ रुपये से अधिक) खर्च करके खरीदा था। अब उन्हें 55 करोड़ रु के मुकाबले 138 करोड़ रु की रकम हासिल हुई है। ये दुर्लभ और 1933 का केवल डबल ईगल वाला सिक्का था जिसे कभी भी निजी स्वामित्व के लिए अनुमति नहीं दी गई।

मिला उम्मीद से ज्यादा

मिला उम्मीद से ज्यादा

उम्मीद की जा रही थी कि नीलामी के दौरान यह सिक्का 1 करोड़ डॉलर (73 करोड़ रुपये) और 1.5 करोड़ डॉलर (100 करोड़ रुपये) के बीच में बिकेगा। मगर दुर्लभ सिक्के के लिए बोली मूल्य बढ़ती रही और आखिर में इसे 138 करोड़ रुपये में खरीदा गया। सिक्के में एक तरफ उड़ता हुए अमेरिकी ईगल का डिजाइन है और दूसरी तरफ लिबर्टी के आगे बढ़ती हुई तस्वीर है। अहम बात ये है कि यह अमेरिका में प्रचलन में आखिरी सोने का सिक्का था।

एक पुराना स्टैम्प बिका

एक पुराना स्टैम्प बिका

इसी नीलामी के दौरान वीट्ज़मैन ने 1856 में जारी एक ब्रिटिश गयाना वन-सेंट मैजेंटा स्टैम्प भी बेचा। यह 83 लाख डॉलर (60 करोड़ रुपये) में नीलाम हुआ। इसके साथ ही यह इतिहास का सबसे मूल्यवान टिकट बन गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार इस सिक्के और स्टैम्प को खरीदारों ने नाम न छापने की शर्त पर खरीदा। इससे पहले 2019 में अमेरिका में एक अत्यंत दुर्लभ चांदी का सिक्का 13.2 लाख डॉलर (9 करोड़ रुपये से अधिक) में बेचा गया था।

बचपन से किए कलेक्ट

बचपन से किए कलेक्ट

रिपोर्ट के अनुसार विट्जमैन बचपन से ही टिकटों और सिक्कों का संग्रह करते रहे हैं। यह उनका पैशन रहा है। उन्होंने कहा कि वह नीलामी से मिले पैसे का उपयोग अपने चेरिटेबल वेंचर्स की फंडिंग के लिए करेंगे। उनके इन वेंचरों में मैड्रिड में मेडिकल रिसर्च, एक डिजाइन स्कूल और एक ज्यूइश म्यूजियम शामिल हैं।

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