Financial Fraud Risk Indicator: देशभर में साइबर फ्रॉड और स्कैम बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 'फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर' (FRI) की शुरुआत का ऐलान किया है। उन्होंने इसे साइबर आधारित वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ भारत का 'कवच' बताया है। इसे दूरसंचार विभाग (DoT) ने डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) के तहत डेवलोप किया है।

क्या है फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI)?
FRI एक टेक इनेबल टूल जो मोबाइल नंबरों को मीडियम, हाई या वेरी हाई रिस्क की कैटेगरी में डिवाइड किया है। यह डिविजन कई सोर्स से मिली जानकारी के आधार पर किया जाता है। जैसे कि नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), DoT का चक्षु (Chakshu) प्लेटफॉर्म, और वित्तीय संस्थानों से मिले अलर्ट।
ये क्लासिफिकेशन बैंकों, यूपीआई प्लेटफॉर्म्स और एनबीएफसी को रियल टाइम में शेयर किया जाता है, जिससे वे लेनदेन पर एडिशनल जांच कर सकें या जरूरत पड़ने पर पेमेंट ब्लॉक कर सकते हैं।
किस तरह करेगा काम?
जब कोई डिजिटल लेनदेन शुरू किया जाता है, तो यूजर के मोबाइल नंबर को FRI डेटाबेस से क्रॉस-चेक किया जाता है। अगर उस नंबर का रिस्क स्कोर ज्यादा होता है जैसे कि वह पहले किसी धोखाधड़ी से जुड़ा रहा हो या उसके पहले भी उस नंबर से फ्रॉड की शिकायत मिली होगी तो एक अलर्ट ट्रिगर होता है।
प्लेटफॉर्म के हिसाब से इस अलर्ट का असर अलग हो सकता है-जैसे कि लेनदेन में देरी, स्क्रीन पर चेतावनी, या पेमेंट को सीधे ब्लॉक कर देना। फोनपे ने FRI को जल्दी अपनाया है और अब Very High Risk नंबरों के लिए ट्रांजैक्शन रिजेक्ट कर देता है, जबकि Medium Risk नंबरों के लिए पहले से ही अलर्ट जारी करता है।
जैसे-जैसे UPI भारत के डिजिटल भुगतान सिस्टम में हावी होता जा रहा है, वैसे-वैसे FRI का रोलआउट एक समय पर और बड़ा कदम माना जा रहा है जिससे लाखों लोगों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने, भरोसा मजबूत करने और देश के डिजिटल इकोसिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में अहम पहल है।
मिलेंगे कई फायदे
FRI टूल की मदद से संदिग्ध नंबरों की पहचान आसान हो जाएगी। जिससे साइबर अपराध या वित्तीय धोखाधड़ी को रोका जा सकेगा। यह टूल यूपीआई बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं के साथ रिएल टाइम में जानकारी शेयर करेगा, जिससे जल्द ही साइबर फ्रॉड से जुड़े नंबर को पहचाना जा सकेगा।
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