Harvard vs Trump: डोनाल्ड ट्रम्प और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच चल रहा विवाद और भी गहरा गया है. ट्रम्प प्रशासन ने हार्वर्ड को मिलने वाले 2.2 बिलियन डॉलर के अनुदान को रोक दिया है, जिसकी वजह से यूनिवर्सिटी को सरकार के खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई करनी पड़ी है.
गाजा और इजरायल वॉर से जुड़ा है मामला
वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन की कार्रवाई का मकसद परिसरों में यहूदी विरोधी भावनाओं को रोकना है. सरकार का दावा है कि पिछले साल इजरायल के गाजा युद्ध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में ऐसा देखने को मिल भावनाएँ व्याप्त थीं. नतीजतन, कोलंबिया जैसे विश्वविद्यालयों के लिए फंडिंग भी रोक दी गई है.
हार्वर्ड का रिएक्शन और कानूनी कार्रवाई
फंडिंग में कटौती के जवाब में हार्वर्ड ने ट्रम्प प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. यूनिवर्सिटी का तर्क है कि इन कार्रवाइयों से उसकी स्वतंत्रता और शैक्षणिक स्वतंत्रता को खतरा है. प्रेसिडेंट एलन गार्बर ने प्रवेश और नियुक्ति प्रथाओं में सरकारी हस्तक्षेप से स्वायत्तता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया.

इन चुनौतियों के बावजूद हार्वर्ड दुनिया के टॉप यूनिवर्सिटीज में से एक बना हुआ है, जो ग्लोबल लेवल पर स्टूडेंट को आकर्षित करता है. 2024-2025 एजुकेशनल ईयर में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स ने इसके नामांकन का 27.2% हिस्सा बनाया, जो इसके वैश्विक आकर्षण को उजागर करता है.
डोनाल्ड ट्रम्प की आलोचना
डोनाल्ड ट्रम्प हार्वर्ड की मौजूदा स्थिति को लेकर अपनी असहमति के बारे में मुखर रहे हैं. ट्रुथ सोशल पर उन्होंने कहा कि हार्वर्ड अब पढ़ाई के लिए अच्छी जगह नहीं रह गया है और इसे दुनिया के बेस्ट यूनिवर्सिटीज या कॉलेजों में नहीं गिना जाएगा.
ट्रम्प प्रशासन इस बात पर जोर देता है कि विश्वविद्यालयों को अपने परिसरों में इजरायल विरोधी परफॉर्मेंस को रोकना चाहिए. उनका कहना है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शन यहूदी विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देते हैं, जिसे वे अस्वीकार्य मानते हैं.
अन्य संस्थाओं पर स्तर
ट्रंप की इस पॉलिसी का असर हार्वर्ड से आगे तक फैला है. कोलंबिया विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों को भी इसी तरह के वजहों से फंडिंग में कटौती का सामना करना पड़ा है.


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