Donald Trump: डोनाल्ड ट्रम्प 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शफथ ग्रहण करने की तैयारी कर रहे हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उनके ट्रेड, वीजा और जलवायु नीतियों के संभावित प्रभाव के बारे में चिंता बढ़ रही है. संयुक्त राज्य अमेरिका, एक प्रमुख आर्थिक और सैन्य शक्ति होने के नाते, वैश्विक विकास और शांति प्रयासों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है. इस प्रकार ट्रम्प के प्रशासन की नीतियाँ विश्व अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए अहम हैं.
ग्लोबल फैक्टर्स पर नजर
ट्रम्प की नीतियों के विस्तारवादी होने का अनुमान है, जिससे संभावित रूप से महंगाई में इजाफा देखने को सकती है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि वह ब्याज दरों के निर्धारण में डेटा पर निर्भर रहेगा. ऊंची महंगाई दर अमेरिका में मौद्रिक सहजता के अंत का संकेत दे सकती है, जिसके चलते बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी होगी और अमेरिकी डॉलर मजबूत होगा, जिससे भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट के लिए टेंशन बढ़ेगा.
भारतीय शेयर बाजार पर असर
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का भारत के शेयर बाजार पर असर पड़ सकता है. उनकी नीतियों के कारण भारत समेत कई देशों पर टैरिफ बढ़ सकता है और इमिग्रेशन में बदलाव के कारण भारतीय तकनीकी क्षेत्र पर असर पड़ सकता है. हालांकि, कुछ एनलिस्ट्स का मानना है कि ट्रंप की नीतियां चीन से ट्रेड और इनवेस्टमेंट फ्लो को दूर करके भारत के लिए अवसर पैदा कर सकती हैं.
वीटी मार्केट्स में ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल ने मिंट से बातचीत में बताया कि ट्रंप का प्रशासन ट्रेड पॉलिसीज और संरक्षणवाद के जरिए एशिया के इकोनॉमिक आउटलुक को नया आकार दे सकता है. अगर टैरिफ और ट्रेड समझौतों के साथ अमेरिकी हितों को प्राथमिकता दी जाती है, तो चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और वियतनाम जैसे देशों को अमेरिकी व्यापार पर अपनी निर्भरता के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
भारत के लिए अवसर
मैक्सवेल मिंट से बातचीत में कहा कि चीन से ट्रम्प के अलगाव से उत्पादन रणनीतियों में बदलाव हो सकता है. इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को विदेशी निवेश में बढ़ोतरी का फायदा मिल सकता है, क्योंकि कंपनियाँ सप्लाई चेन में विविधता ला रही हैं. इसके अतिरिक्त भारत को भी फायदा हो सकता है क्योंकि कंपनियां कम लागत का फायदा उठाने के लिए चीन से अपना ऑपरेशंस ट्रांसफर कर रही हैं.

मैक्सवेल ने मिंट से कहा कि अगर चीन के साथ ट्रेड रुकावट जारी रहती हैं, तो भारत एक बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में तेजी से डेवलपमेंट देख सकता है. हालांकि, चीन और जापान जैसे देश जो अमेरिकी निर्यात पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. निरंतर टैरिफ और संरक्षणवादी उपायों के कारण संघर्ष कर सकते हैं.
मार्केट की इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी
मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के अरिंदम मंडल ने मिंट से बातचीत में कहा कि ट्रंप के शासन में निर्यात-संचालित क्षेत्रों को तरजीह देने वाली "चीन + 1" रणनीति जारी रहेगी. भारतीय आईटी फर्मों को पहले ही इस ट्रेंड से लाभ मिल चुका है.
स्टॉक्सबॉक्स के मनीष चौधरी ने भी मिंट से बताया कि कोई भी नीतिगत बदलाव धीरे-धीरे होगा, जिससे बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में वृद्धि को कम करने में मदद मिलेगी. भारत जैसी इमर्जिंग इकोनॉमीज को एफआईआई की बिकवाली घटने से फायदा होगा. उन्होंने कहा कि निवेशकों को मीडिम टू लॉन्ग टर्म के फायदे के लिए ठीकठाक वैल्यूएशंस वाले हाई क्वालिटी वाले शेयरों पर फोकस करना चाहिए.
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