Rupee Vs Dollar: सोमवार को रुपये की बढ़त जारी रही। शुरुआती कारोबार में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 33 पैसे बढ़कर 92.85 पर पहुंच गया। यह 93.13 पर खुला था। जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ा, यह लगातार मजबूत होता गया दोपहर करीब 12:57 बजे, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.14 पर कारोबार कर रहा है।

यह बढ़त पिछले हफ्ते की जोरदार तेजी का ही विस्तार है। गुरुवार को रुपया करीब 1.8% उछलकर 93.10 पर बंद हुआ था। यह पिछले 12 साल से भी ज्यादा समय में एक दिन में हुई सबसे बड़ी बढ़त में से एक थी। हालिया बदलाव, लगातार बनी रही कमजोरी की अवधि के बाद, अल्पकालिक धारणा में आए बदलाव का संकेत देता है।
रुपये में तेजी की वजह क्या है?
भारतीय रिजर्व बैंक का दखल और पॉलिसी में सख्ती ही इस रिकवरी के मुख्य कारण थे। केंद्रीय बैंक ने करेंसी को स्थिर करने और सट्टेबाजी के दबाव को कम करने के लिए कदम उठाए हैं। आरबीआई ने फॉरेक्स डेरिवेटिव्स मार्केट में नियमों को सख्त किया है। इसने बैंकों की नेट ओपन पोजिशन्स की सीमा भी 100 मिलियन डॉलर तय कर दी है। इससे रुपये के खिलाफ आक्रामक पोजिशन लेने पर प्रभावी रूप से रोक लगती है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि RBI एक साफ संकेत दे रहा है। वह करेंसी की बेतरतीब गिरावट को रोकना चाहता है। साथ ही, उसका मकसद करेंसी मार्केट में उम्मीदों को स्थिर रखना भी है।
रुपया क्यों गिर रहा था?
फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि अस्थिर भू-राजनीतिक स्थिति के बीच, विदेशी पूंजी की लगातार निकासी, डॉलर के मजबूत होने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव बना रहा। वैश्विक तनाव के कारण रुपया दबाव में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ तनाव बढ़ा दिया है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए मंगलवार तक की समय सीमा दी है और चेतावनी दी है कि इसका पालन न करने पर ईरान के बिजली ढांचे पर हमले हो सकते हैं।


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