मुंबई। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 17 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 3.09 अरब डॉलर बढ़कर 479.57 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। यह 13 मार्च के बाद का उच्चतम स्तर है। यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है। इससे पहले 10 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में यह 1.82 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 476.48 अरब डॉलर रहा था। ऐसे में अब बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार को संभालने के लिए भारत को अमेरिकी ट्रेजरी बांड में निवेश बढ़ाना पड़ रहा है।

आरबीआई ने जारी किए आंकड़े
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से आज जारी आंकड़ों के अनुसार, 17 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 1.55 अरब डॉलर बढ़कर 441.88 अरब डॉलर हो गईं। आरबीआई ने इस दौरान सोने की भी खरीद की। इससे स्वर्ण भंडार 1.54 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 32.68 अरब डॉलर पर पहुंच गया। आलोच्य सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास आरक्षित निधि 3.58 अरब डॉलर पर स्थिर रही। विशेष आहरण अधिकार 30 लाख डॉलर बढ़कर 1.43 अरब डॉलर पर रहा।
बढ़ती विदेशी मुद्रा का करना पड़ रहा अमेरिका में निवेश
आरबीआई के पास बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार को संभालने के लिए अमेरिकी सरकार के बांड में निवेश बढ़ाना पड़ रहा है। अमेरिका सरकार की प्रतिभूतियों में भारत का निवेश फरवरी, 2020 में 13 अरब डॉलर बढ़कर 177.5 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। पिछले एक साल यानी फरवरी, 2019 से अमेरिकी प्रतिभूतियों में भारत के निवेश में 33.2 अरब डॉलर का जोरदार इजाफा हुआ है। अमेरिका के वित्त विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 1 माह के दौरान अमेरिकी प्रतिभूतियों में भारत के निवेश में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। भारत पिछले साल नवंबर से अमेरिकी प्रतिभूतियों में अपना निवेश लगातार बढ़ा रहा है। उस समय यह 159.2 अरब डॉलर था। अमेरिकी प्रतिभूतियों में सबसे ज्यादा 1,268 अरब डॉलर का निवेश जापान का है। उसके बाद 1,092 अरब डॉलर के साथ चीन का नंबर आता है। ब्रिटेन 403.2 अरब डॉलर के साथ अच्छे-खासे अंतर से तीसरे स्थान पर है। भारत इस सूची में 13वें स्थान पर है।
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