नई दिल्ली, सितंबर 01। चेक से पेमेंट करने वालों के लिए यह खबर काफी काम की है। चेक से पेमेंट के मामले में सुप्रीम कोर्ट (एससी) का एक बड़ा ऑर्डर सामने आया है। एससी के मुताबिक अगर किसी के चेक में कोई अन्य व्यक्ति भी डिटेल भरता है तब भी जिम्मेदारी चेक ड्रॉअर (जिसका चेक है) की ही होती है। इस मामले में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एएस बोपन्ना की दो न्यायाधीशों की पीठ ने चेक बाउंस मामले में अपील की अनुमति देते हुए यह बात कही है।
चेक को खारिज नहीं किया जा सकता
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने कहा कि यदि कोई हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट ये बताती है कि चेक में डिटेल उस व्यक्ति ने नहीं भरी जिसका चेक है, तो इस स्थिति में भी चेक को खारिज (डिस्क्रेडिट) नहीं किया जा सकता है।
क्या है मामला
ये मामला एक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसने एक प्राप्तकर्ता (चेक प्राप्तकर्ता) को एक खाली साइन किया हुआ चेक दे दिया और अदालत में ये बात स्वीकार की। फिर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा एक हैंडराइटिंग एक्सपर्ट को नियुक्त करने की अनुमति दी गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि डिटेल उसके हाथ से भरी गयी है या नहीं।
चेक पर हस्ताक्षर करने वाला जिम्मेदार
शीर्ष अदालत ने कहा कि चेक पर हस्ताक्षर करने वाला, जब पेई (जिसे पेमेंट मिलती है) को चेक देता है, तो उसे तब तक उत्तरदायी माना जाता है जब तक कि यह साबित नहीं हो जाता है कि चेक डेब्ट के भुगतान या लायबिलिटी के डिस्चार्ज के लिए जारी किया गया था। अदालत ने कहा कि इस तरह के निर्धारण के लिए, तथ्य यह है कि चेक में डिटेल ड्रॉअर (चेक जारी करने वाला) द्वारा नहीं बल्कि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भरी गयी है।
नहीं मिलेगी राहत
अदालत ने कहा कि हैडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट कि क्या डिटेल ड्रॉअर द्वारा भरी गयी या नहीं, इस बात की इस बचाव के लिए कोई भूमिका नहीं है क्या चेक किसी डेब्ट लायबिलिटी देयता के भुगतान के लिए जारी किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मई में चेक बाउंस के मामलों के त्वरित निपटान के लिए पांच राज्यों में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के साथ विशेष अदालतों के गठन का निर्देश दिया था।
नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (एनआई)
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (एनआई) के तहत महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान राज्यों में लंबित मामलों की एक बड़ी संख्या को देखते हुए विशेष अदालतों की स्थापना की गई थी। इन राज्यों में चेक बाउंस से लंबित कई मामलों के मद्देनजर तीन-न्यायाधीशों के पैनल में जस्टिस एल नागेश्वर राव, बीआर गवई और एस रवींद्र भट को शामिल किया गया था। कहा गया था कि महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान राज्य विशेष अदालतें स्थापित करेंगे, जो कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत स्थापित होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी देश भर में चेक बाउंस के मामलों का तेजी से समाधान सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत ने यह भी अनुरोध किया कि केंद्र यह सुनिश्चित करने के लिए कानून में संशोधन करे कि ऐसे मामलों में मुकदमे शामिल हो जाएं यदि वे एक वर्ष के भीतर एक ही व्यक्ति के खिलाफ लाए जाते हैं और एक ही लेनदेन से जुड़े होते हैं।
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