नई दिल्ली, फरवरी 5। भारतपे में चल रहा विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। भारतपे के सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर ने कंपनी के निवेशकों से अपनी हिस्सेदारी खरीदने के लिए 4,000 करोड़ रुपये की मांग की है। ग्रोवर के मुताबिक यदि निवेशक चाहते हैं कि वह कंपनी से बाहर निकलें तो उन्हें 4000 करोड़ रु चाहिए। ग्रोवर पर धोखाधड़ी और कॉर्पोरेट गवर्नेंस इश्यू से जुड़े आरोप लगे हैं। शुरुआती जांच में भारतपे में रिक्रूटमेंट फ्रॉड की बात सामने आई है। दूसरा बड़ा आरोप है उन वेंडर्स को भुगतान किया जाना, जो असल में है ही नहीं।
क्या है मामला
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार भारतपे में बोर्ड स्तर काफी विवाद है। इसके निवेशकों और सीईओ सुहेल समीर के नेतृत्व वाले बोर्ड ने फोरेंसिक ऑडिट के लिए अल्वारेज और मार्सल एंड पीडब्ल्यूसी को नियुक्त किया है। इससे पहले ग्रोवर कुछ समय पहले अस्थायी छुट्टी पर चले गए थे। उन्होंने कहा था कि वह 31 मार्च से पहले वापस आ जाएंगे। दरअसल एक ऑडियो क्लिप लीक हुई थी। उसमें ग्रोवर ने कथित तौर पर नायका के आईपीओ में निवेश करने में सक्षम नहीं होने के लिए कोटक के एक कर्मचारी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इसके बाद ग्रोवर और कोटक के बीच एक दूसरे को कानूनी नोटिस भेजे गए।
ये है गड़बड़ वाला मामला
बता दें कि भारतपे की तरफ से एचआर कंसल्टेंट्स के जरिए नये कर्मचारियों की भर्ती की जाती थी। इसके लिए इन एचआर कंसल्टेंट्स को पैसे दिए जाते थे। मगर जब जांच हुई तो सामने आया कि कंपनी खुद ही स्टाफ की भर्ती कर रही है। मगर इस काम के लिए कई फर्मों को पैसे दिए गए। वो भी ऐसी फर्मों को जिनका रिक्रूटमेंट से कोई संबंध नहीं। बाद में पता चला कि ये कंपनियां आपस में लिंक्ड हैं। ये भी सामने आया कि इन कंपनियों का संबंध माधुरी ग्रोवर से है, जो अशनीर की पत्नी हैं।
माधुरी भी छुट्टी पर गयीं
पिछले हफ्ते एक रिपोर्ट में बताया गया था कि अशनीर की पत्नी माधुरी भी छुट्टी पर चली गई हैं। साथ ही भारतपे का बोर्ड उन इनवॉइस की जांच कर रहा है, जिनमें बढ़ा कर भुगतान किया गया है और कुछ विक्रेताओं के फर्जी होने सहित मामलों पर गौर कर रहा है। ये भी पाया गया है कि दो वेंडर ऐसे हैं जिन्हें भारतपे की तरफ से करीब 4 करोड़ रुपये की पेमेंट की गयी, मगर उस काम के लिए जो कभी हुए ही नहीं। कंपनियों के लिए इनवॉयस तैयारी माधुरी के भाई ने किए।


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