नई दिल्ली, फरवरी 2। क्रिप्टोकरेंसी एक ऐसी डिजिटल एसेट है, जिसने बीते कुछ सालों में भारतीय निवेशकों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। लोग इसमें ट्रेड कर रहे हैं और खूब पैसा लगा रहे हैं। मगर ऐसे निवेशकों के सामने एक डर था। ये डर था कि सरकार क्रिप्टो बैन कर सकती हैं। मगर अब ये डर दूर हो चुका है। सरकार ने ऐलान कर दिया है क्रिप्टो में ट्रेड अवैध नहीं है। ये क्रिप्टो में निवेश करने वालों के लिए वाकई राहत की खबर है। हालांकि क्रिप्टो लेन-देन पर भारी टैक्स का ऐलान बजट 2022 में किया गया है।
जम कर लगाएं पैसा
भारत सरकार की तरफ से कहा गया है कि क्रिप्टो एसेट्स में ट्रेडिंग को अवैध नहीं माना जाएगा। यह खुलासा उस ऐलान के एक दिन बाद हुआ है जिसमें सरकार ने क्रिप्टो पर जुए में जीतने वाली रकम पर लगने वाले टैक्स के बराबर ही टैक्स लगाने की बात कही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने एक इंटरव्यू में कहा कि क्रिप्टो एक ग्रे एरिया में हैं। उन्होंने बताया कि क्रिप्टो में लेन-देन अवैध नहीं है।
क्रिप्टो पर लगेगा टैक्स
सोमनाथन के अनुसार सरकार ने एक टैक्सेशन फ्रेमवर्क में तैयार किया है। इसें क्रिप्टो एसेट्स को उसी तरह देखा जाएगा जैसे घुड़दौड़ या कोई अन्य सट्टा लेनदेन से जीत की रकम को देखा जाता है और उसी हिसाब से टैक्स लगेगा। क्रिप्टोकरेंसी पर सरकार का क्या रुख होगा, ये कई सालों के बाद तय हुआ है। मगर इतना अब तय है कि भारत सरकार की क्रिप्टो को बैन करने की कोई योजना नहीं है।
साफ हुआ सरकार का रुख
सरकार ने बजट में वर्चुअल एसेट्स के लेनदेन पर 30 फीसदी टैक्स का ऐलान किया है। इससे क्रिप्टो में लेनदेन को लेकर सरकार का रुख साफ हुआ है। माना जा रहा है कि क्रिप्टो पर ऊंची टैक्स रेट से भारत में इसके ट्रेड में कमी आ सकती है। असल में आरबीआई ने क्रिप्टो को लेकर सरकार को मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फाइनेंस, इनकी कीमतों के अस्थिर होने के जोखिमों को लेकर चेताया था।
रेगुलेशन क्लियर नहीं
बता दें कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी को कैसे रेगुलेट करेगी ये फिलहाल क्लियर नहीं है। अभी सरकार इसके लिए एक कानून पर काम चल रहा है। इस कानून के तैयार होने के बाद पहले यूनियन कैबिनेट और संसद में पास कराना होगा। सोमनाथन ने भी इस बात को क्लियर किया है कि क्रिप्टो को कैसे रेगुलेट किया जाएगा इस पर बहस जारी है। सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या हो रहा है ये भी देख रही है।
लीगल टेंडर नहीं होंगे
वित्त सचिव ने साफ किया है कि सरकार इन रेगुलेशन पर किसी जल्दबाजी काम नहीं लेगी। मगर इस तरह के लेनदेन से होने वाली कमाई पर टैक्स वसूलेगी। वहीं प्राइवेट वर्चुअल कॉइंस को लीगल टेंडर हासिल नहीं होंगा। यानी उनमें करेंसी का दर्जा नहीं मिलेगा। आगे रिजर्व बैंक अगले वित्त वर्ष में खुद की डिजिटल करेंसी लॉन्च करने जा रहा है। वित्त मंत्री ने बजट में डिजिटल करेंसी को लेकर एक बड़ा ऐलान किया। उनके अनुसार ब्लॉकचेन और अन्य तकनीकों का उपयोग करके डिजिटल रुपया जारी किया जाएगा। इससे अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
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