भारत में जल्द ही नई तकनीकि क्रांति होगी. क्योंकि जून 2025 तक फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक (एफआरटी) को लागू करने की बात चल रही है. साथ ही अपने पैसेंजर्स के लिए ई-पासपोर्ट लॉन्च करके अंतर्राष्ट्रीय हवाई यात्रा में क्रांति लाने की कगार पर है. दरअसल, इस डेवलपमेंट के जरिए एयरपोर्ट के प्रोसेस को बेहतर और सुरक्षित बनाना है.
डिजी यात्रा फाउंडेशन (DigiYatra Foundation) के सीईओ सुरेश खड़कभवी ने बताया कि इस दिशा में जल्द ही एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया जाएगा, जोकि दो देशों के बीच एफआरटी की क्षमता का पता लगाएगा. यह भारत के एयरलाइंस सेक्टर के लिए अहम कदम होगा.
डिजीयात्रा: भविष्य की यात्रा की ओर एक कदम
डिजीयात्रा (DigiYatra), एक मोबाइल बेस्ड प्लेटफॉर्म है. यह मौजूदा समय में हवाई यात्रियों के लिए आईडी और ट्रैवल डॉक्युमेंट्स को सुरक्षित रखता है. इसके जरिए एयरपोर्ट पर संपर्क रहित एंट्री और सेफ्टी मंजूरी प्रदान करने के लिए चेहरे की बायोमेट्रिक्स का यूज करता है, जिससे फिजिकल आइडेंटिफिकेशन के जरूरत खत्म हो जाती है.

सुरेश खड़कभवी ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बताया कि मौजूदा समय में, डिजीयात्रा सेवा कई प्रमुख भारतीय हवाई अड्डों पर चालू है. इन एयरपोर्ट में दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, बेंगलुरु का केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, हैदराबाद का राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा शामिल हैं. साथ ही मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और पुणे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा समेत कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा शामिल है.
ई-पासपोर्ट से मजबूत होगी वैश्विक स्थिति
एफआरटी के अलावा, भारत इंटरनेशनल पैसेंजर्स के लिए ई-पासपोर्ट शुरू करने की योजना बना रहा है. जैसे ही सरकार उन्हें जारी करना शुरू करेगी, भारतीय नागरिकों को इसकी सुविधा मिल जाएगी. यह पहल भारत को सिंगापुर और यूरोपीय संघ के सदस्यों जैसे देशों के साथ खड़ा करती है, जिन्होंने पहले ही ई-पासपोर्ट सिस्टम को अपना लिया है. ई-पासपोर्ट को लेकर खड़कभावी ने कहा कि हमारा विजन भारतीय अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए यात्रा सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक कदम है.


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