नयी दिल्ली। लॉकडाउन की वजह से देश के लाखों मजदूर, गरीब और खेती मजदूर परेशान हैं। सरकार ने ऐसे लोगों की मदद के लिए खास ऐलान किए हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत देश भर के करोड़ों लोगों के खातों में सरकार सीधे पैसे भेज रही है। मगर लोगों को कैसे पता चले कि उनके खाते में सरकारी मदद के पैसे आए या नहीं? अपना बैलेंस जानने के लिए लाखों दिहाड़ी मजदूरों, प्रवासी और खेती मजदूरों ने बैंकों के डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया। मगर इससे एक अजीब ही घटना सामने आई। दरअसल लाखों लोगों के एक साथ बैलेंस इंक्वारी करने से बैंकरों और पेमेंट ऑपरेटर्स के डिजिटल माध्यम में ही रुकावट आ गई। इससे आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) का उपयोग करते हुए लेन-देन फेल होने की दर 40-45 फीसदी पर पहुंच गई, जिससे बैंकों के लिए और काम बढ़ गया।
बार-बार बैलेंस जानने से और बढ़ी दिक्कत
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी दिनेश त्यागी कहते हैं कि सरकार बहुत सारे लोगों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर कर रही है। इसलिए अपने बैलेंस के बारे में पूछताछ करना एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है। मगर इससे लेन-देन फेल होने की 40% के करीब है और बार-बार बैलेंस पूछने से और भी अधिक दिक्कत बढ़ रही है। भारत में 370,000 से अधिक डिजिटल कियोस्क हैं, जिन्हें कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) कहा जाता है। इनमें अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इसमें से लगभग 25,000 सीएससी में पीएम किसान और पीएम उज्जवला योजनाओं जैसी स्कीमों के तहत मिलने वाली सरकारी सब्सिडी निकालने की सुविधा है।
रोकने पड़ी बैलेंस इंक्वारी रिक्वेस्ट
सिस्टम पर असर पड़ने से पिछले 2 हफ्तों में सभी तरह की बैलेंस इंक्वारी रिक्वेस्ट को स्वीकार करने से रोकना पड़ा। त्यागी कहत हैं कि इससे हमारे सिस्टम डाउन और सभी तरह की सेवाएं प्रभावित हो रही थीं। सीएससी को रोज बैलेंस इंक्वारी के लिए 5 लाख और पैसे निकालने के लिए 1 लाख अनुरोध प्राप्त हो रहे थे। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया द्वारा चलाया जाने वाला एईपीएस प्लेटफ़ॉर्म सरकार की डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफपर प्लेटफ़ॉर्म का केंद्र है, जिसके जरिए गरीब महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और किसानों को नकद आर्थिक मदद दी जाती है। मगर इसी सिस्टम में अधिक बैलेंस इंक्वारी से दिक्कत आ रही थी।
मार्च में कितने हुए लेन-देन
एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में एईपीएस पर बैलेंस पूछताछ और मिनी स्टेटमेंट के लिए 2.6 करोड़ लेन-देन हुईं, जिसमें 10,100 करोड़ रुपये की लेन-देन सिर्फ पैसे निकालने के लिए हुईं। सरकारी मदद की बात करें तो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 31,325 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देश के करोड़ों लोगों को दी गई है। जनधन के तहत 20.05 करोड़ महिला बैंक खाताधारकों को अब तक 10,025 करोड़ रुपये भेज दिए गए।
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