Diesel Price Hike: इस राज्य में आम लोगों को लगा झटका! महंगा मिलेगा डीजल, 1L का रेट अब इतना हुआ

Diesel Price Hike in Karnataka: कर्नाटक सरकार ने 1 अप्रैल, 2025 से डीज़ल पर बिक्री कर बढ़ाकर 21.17% कर दिया है. इस बदलाव के चलते 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी होगी, जिससे नई बिक्री कीमत 91.02 रुपए प्रति लीटर हो जाएगी. इससे पहले 15 जून 2024 तक टैक्स की रेट्स 18.44% तय की गई थी.

इस बढ़ोतरी के बावजूद कर्नाटक में डीजल की कीमतें पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम हैं. 31 मार्च 2025 तक बेंगलुरु में डीजल की कीमत 89.02 रुपए प्रति लीटर है. इसके उलट आस-पास के इलाकों में कीमतें ज्यादा हैं...

शहर डीजल की कीमत (₹/ लीटर)

होसुर (तमिलनाडु) 94.42
कासरगोड (केरल) 95.66
अनाथपुरा (आंध्र प्रदेश) 97.35
हैदराबाद (तेलंगाना) 95.70
कागल (महाराष्ट्र) 91.07

अन्य प्रमुख शहरों में डीजल की कीमतें

दिल्ली में डीजल की कीमत 87.67 रुपए प्रति लीटर है, जबकि मुंबई में इसकी कीमत 90.03 रुपए प्रति लीटर है. बेंगलुरु में इसकी कीमत 90.99 रुपए प्रति लीटर है, जबकि हैदराबाद में यह 95.7 रुपए प्रति लीटर है. चेन्नई में इसकी कीमत 92.39 रुपए प्रति लीटर है, जबकि अहमदाबाद और कोलकाता में डीजल की कीमत 90.16 रुपए प्रति लीटर है.

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पेट्रोल-डीजल महंगा मिलने की वजह?

OMCs हर दिन फ्यूल रेट्स अपडेट करती हैं. सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में से एक इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी IOCL के ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपए प्रति लीटर पर बिक रहा है. इसका कैलकुलेशन समझते हैं. एक लीटर का बेस प्राइस 55.46 रुपए रहा. भाड़ा पर खर्च 20 पैसे रहा. इसमें 19.90 रुपए की एक्साइज ड्यूटी जुड़ गई. फिर 3.77 रुपए का डीलर कमीशन भी जुड़ गया. इसके अलावा 15.39 रुपए का VAT लगा. इस लिहाज से पेट्रोल का भाव 94.72 रुपए हो गया.

सरकारी कंपनी की ही वेबसाइट पर डीजल की कीमतों का गणित समझतें हैं. इसके बेस प्राइस 56.20 रुपए है. इसमें भाड़ा खर्च 22 पैसे लगा. एक्साइज ड्यूटी 15.80 रुपए लगा. फिर औसत डीलर कमीशन 2.58 रुपए हुआ. आगे 12.82 रुपए का VAT लग गया. इस लिहाज से ग्राहकों को एक लीटर डीजल 87.62 रुपए का मिलता है.

कैसे तय होता है डीजल की कीमतें?

भारत में डीजल की कीमतें कई फैक्टर्स से प्रभावित होती हैं. इसमें इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतें एक बड़ा फैक्टर है, जो ग्लोबल सप्लाई और डिमांड के साथ उतार-चढ़ाव करती हैं. इसके अलावा भारतीय रुपए और अमेरिकी डॉलर के बीच विनिमय दर महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया भर में कच्चे तेल का लेन-देन डॉलर में होता है.

आयात के बाद कच्चे तेल को डीज़ल बनाने के लिए रिफाइन किया जाता है, जिससे एक्स्ट्रा कॉस्ट आती है. रिफाइनरियाँ इस प्रोसेस को संभालती हैं, जिसमें रिफाइनिंग और ऑपरेशन खर्च दोनों शामिल हैं.

डीजल की कीमतों पर सरकारी टैक्स का असर

सरकारी करों का डीजल की कीमतों पर काफी असर पड़ता है. केंद्र सरकार डीजल पर उत्पाद शुल्क लगाती है. इस बीच राज्य सरकारें या तो मूल्य वर्धित कर (वैट) या बिक्री कर लगाती हैं, जो एक राज्य से दूसरे राज्य में अलग-अलग होता है. ये कर सामूहिक रूप से अंतिम रिटेल प्राइस में योगदान करते हैं जो उपभोक्ता पंप पर चुकाते हैं.

डीजल पंप डीलर भी कमीशन कमाते हैं, जो खुदरा मूल्य का हिस्सा होता है. यह कमीशन सुनिश्चित करता है कि डीलरों को अंतिम उपयोगकर्ताओं को डीजल वितरित करने में उनकी भूमिका के लिए मुआवजा दिया जाता है. इस प्रकार आयात से लेकर वितरण तक का हर घटक भारत में डीजल की अंतिम लागत को प्रभावित करता है.

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